

महाराष्ट्र के नांदेड में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है. पुलिस ने हमले के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. घटना के बाद पक्ष विपक्ष के नेताओं ने इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है. इस हमले को लेकर एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की.
उन्होंने बताया कि सुखबीर बादल पिछली रात नांदेड पहुंचे थे. जैसे ही हमलावर ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की एक सुरक्षा कर्मी ने बीच में आकर उन्हें बचाया. इस दौरान सुरक्षा कर्मी को गंभीर चोट लगी. पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि घटना की पूरी कड़ी और हमले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि सुखबीर सिंह बादल पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका हौसला बना हुआ है.
ਸ.ਸੁਖਬੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਬਾਦਲ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਠੀਕ ਠਾਕ ਅਤੇ ਚੜ੍ਹਦੀ ਕਲਾ ਵਿੱਚ ਹਨ – ਐਡਵੋਕੇਟ ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਲੇਰ pic.twitter.com/0yogaHyVxt
— Shiromani Akali Dal (@Akali_Dal_) August 13, 2026
राजा वड़िंग बोले- राजनीतिक गुस्सा हिंसा का कारण नहीं
पंजाब कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा ने भी घटना की निंदा की. उन्होंने कहा कि सिख संगत के भीतर बेहबल कलां, बरगाड़ी बेअदबी और 2015 की पुलिस फायरिंग जैसे मामलों को लेकर गुस्सा और नाराजगी है. इन मामलों में न्याय में देरी को लेकर भी असंतोष है. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि राजनीतिक गुस्सा हिंसा को सही नहीं ठहरा सकता. न्याय लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही के जरिए होना चाहिए.
Sikh Sangat have genuine anger over Behbal Kalan, Bargari sacrilege, the 2015 police firing, delayed justice in sacrilege cases and several other unresolved issues. There is also deep disappointment with the @Akali_Dal_‘s handling of these matters.
But political anger cannot…
— Amarinder Singh Raja Warring (@RajaBrar_INC) August 13, 2026
आरपी सिंह ने पंजाब के पुराने दौर की दिलाई याद
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा कि नांदेड में सुखबीर सिंह बादल पर हमला बेहद निंदनीय है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है. राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं लेकिन हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती.
उन्होंने पंजाब में आतंकवाद और हिंसा के पुराने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब और पंजाबी समुदाय ने उन मुश्किल वर्षों में बहुत कुछ झेला है. कई पीढ़ियां आज भी उस दौर के दर्द को महसूस करती हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में उन दिनों को वापस नहीं आने देना चाहिए.
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