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गोडावणों की जंगल रिटर्न की ट्रेनिंग शुरू, 9.25 करोड़ के रामदेवरा टनल से लौटेंगे जंगल | training of 98 great indian bustards started they will now return to the forest via the 9.25 crore ramdevra tunnel


राजस्थान के विलुप्तप्राय राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में राजस्थान के थार रेगिस्तान से बड़ी और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है. वर्षों की वैज्ञानिक मेहनत के बाद अब ‘प्रोजेक्ट GIB’ दूसरे और सबसे अहम चरण में प्रवेश कर चुका है. पोकरण के रामदेवरा गोडावण संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र से कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटरों में तैयार किए गए गोडावण अब प्राकृतिक आवास में लौटने की तैयारी कर रहे हैं. NDTV से विशेष बातचीत में जैसलमेर के उपवन संरक्षक (वन्यजीव) अशोक सिंह ने बताया कि सम और रामदेवरा स्थित दोनों ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावणों की संख्या बढ़कर 98 हो चुकी है. अब परियोजना के अगले चरण के तहत इन पक्षियों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सबसे पहले तीन गोडावणों को जंगल भेजा जााएगा.

रामदेवरा में विशेष टनल

अशोक सिंह ने बताया कि इसके लिए रामदेवरा में करीब 9.25 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक रीवाइल्डिंग स्ट्रक्चर (टनल) तैयार किया गया है. 24 जुलाई को R-9, R-10 और R-11 नाम के तीन चूजों को इस टनल में शिफ्ट किया गया है. अगले चार महीने तक इन्हें जंगल जैसा वातावरण दिया जाएगा, ताकि वे खुद भोजन तलाशना, शिकारियों से बचना और प्राकृतिक परिस्थितियों में जीना सीख सकें. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा.

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‘जीरो ह्यूमन टच’

उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में ‘जीरो ह्यूमन टच’ की नीति अपनाई गई है. पक्षियों को भोजन और पानी विशेष व्यवस्था के जरिए दिया जा रहा है ताकि उनका इंसानों से संपर्क न्यूनतम रहे. वहीं वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की विशेषज्ञ टीम 24 घंटे CCTV निगरानी के माध्यम से उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है.

रामदेवरा में बना खास टनल

रामदेवरा में बना खास टनल
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पहले छोटे चूजे लौटेंगे

अशोक सिंह ने बताया कि फिलहाल केवल कम उम्र के चूजों को ही रीवाइल्डिंग के लिए चुना जा रहा है, क्योंकि वे प्राकृतिक वातावरण में आसानी से खुद को ढाल लेते हैं. वहीं वयस्क गोडावणों को ब्रीडिंग और प्रजनन कार्यक्रम के लिए सेंटर में ही रखा जाएगा.

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन, जंप स्टार्ट तकनीक और जंगल से अंडों के वैज्ञानिक संग्रह जैसी आधुनिक तकनीकों की बदौलत गोडावण संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है. साथ ही पक्षियों की जेनेटिक विविधता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

वन विभाग का मानना है कि यदि यह रीवाइल्डिंग मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में थार के प्राकृतिक आवास में गोडावणों की संख्या बढ़ेगी और देश के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल इस प्रजाति के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी.

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