

भारत समेत एशिया के देशों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार कानून बन रहे हैं. उन्हें ज्यादा से ज्यादा मौके दिए जा रहे हैं. वहीं पश्चिम में उल्टी बयार बह रही है. वहां महिलाओं के अधिकार कम करने पर बहस चल रही है. लैटिन अमेरिकी देशों के संसद में इसको लेकर बिल पेश किए जा रहे हैं.
किन-किन देशों में क्या कानून लाए जा रहे
- बोलिविया में, सांसदों ने महिला हिंसा से संबंधित देश के कानून 348 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत लिंग आधारित हिंसा की झूठी रिपोर्ट करने पर छह साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है. एक अन्य विधेयक झूठे आपराधिक आरोपों के लिए सजा को और अधिक कठोर बनाएगा, साथ ही लिंग आधारित हिंसा और यौन अपराधों से जुड़े आरोपों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करेगा.
- अर्जेंटीना में, सीनेट के समक्ष लंबित एक विधेयक भी झूठे आरोपों के लिए सजा में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा. ये विधेयक वर्तमान अधिकतम सजा को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर देगा, और लिंग आधारित हिंसा, यौन अपराधों या बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़े आरोपों के लिए इसे छह वर्ष तक कर देगा.
- चिली ने इससे भी आगे बढ़कर पारिवारिक न्यायालय की कार्यवाही से उत्पन्न कथित झूठी शिकायतों के लिए एक विशेष प्रक्रिया का प्रस्ताव रखा है, जिसमें घरेलू हिंसा और यौन अपराध के मामले शामिल हैं.
- पेरू में, सांसदों ने महिलाओं या परिवार के खिलाफ हिंसा से जुड़े झूठे आरोपों के लिए सख्त सजा का प्रस्ताव रखा है, जिसमें छह साल तक की जेल हो सकती है.
- चिली में, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न की झूठी रिपोर्टिंग के लिए सजा का प्रावधान करने वाले एक बिल प्रस्तावित है. एक सांसद ने संसद के टेलीविजन प्रोग्राम ‘प्रोफंडिडाड डी कैम्पोस’ में कहा, “आज, झूठे आरोप हमारे समाज में एक ट्यूमर की तरह हैं, जो कैंसर की तरह फैल रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं.
महिला समर्थक क्या कहते हैं?
बोलीविया में, Ipas (रिप्रोडक्टिव हेल्थ के क्षेत्र में काम करने वाली एक इंटरनेशनल नॉन-प्रॉफिट संस्था) के पॉलिसी कोऑर्डिनेटर मार्टिन विडौरे का कहना है कि हिंसा की रिपोर्ट करते समय महिलाओं को पहले से ही कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है – जैसे कि न्याय व्यवस्था पर बहुत ज़्यादा बोझ, आर्थिक रुकावटें और संस्थागत भेदभाव. फिर भी, एक मज़बूत उल्टी सोच या नैरेटिव बन गया है: कि महिलाएं अक्सर झूठी रिपोर्ट करके सिस्टम का गलत फ़ायदा उठाती हैं.
पुरुष समर्थक क्या कहते हैं?
चिली की सीनेटर वैनेसा कैसर का मानना है कि पुरुषों पर हमले हो रहे हैं और उन्हें फेमिनिज़्म (नारीवाद) से पैदा हुई गलत चीजों से बचाने की जरूरत है, जिसमें जेंडर-बेस्ड और यौन हिंसा के झूठे आरोप भी शामिल है. वह कहती हैं, “मैं पश्चिम के इतिहास में पुरुषों का बचाव करने वाली पहली मंत्री बनना चाहती हूं.” कैसर की बातें लैटिन अमेरिका में तेजी से फैल रही एक सोच को दिखाती हैं: महिलाओं को हिंसा से बचाने के लिए बनाए गए कानून हद से ज्यादा आगे बढ़ गए हैं, जिससे पुरुष बुरे इरादे से लगाए गए आरोपों का शिकार हो सकते हैं. अब, इस इलाके के नेता इस तर्क को कानून का रूप देने लगे हैं.
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