

मुंबई:
महाराष्ट्र में सरकारी ठेकेदारों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, विभिन्न सरकारी विभागों में करीब 86,000 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि बकाया होने के विरोध में ‘महाराष्ट्र राज्य सरकारी ठेकेदार महासंघ’ ने 18 और 19 अगस्त को मुंबई के आजाद मैदान में एक बड़े आंदोलन का ऐलान किया है. मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने और लगातार फॉलो-अप के बावजूद कोई समाधान नहीं निकलने पर ठेकेदारों ने आंदोलन का रास्ता चुना है.
समय पर भुगतान न मिलने के कारण राज्य भर के 20,000 से अधिक ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं.
किस विभाग पर कितना है बकाया? (अनुमानित आंकड़े)
- जल आपूर्ति विभाग (Water Supply): ₹ 40,000 करोड़
- लोक निर्माण विभाग (PWD): ₹ 17,500 करोड़
- अन्य विविध विभाग: ₹ 10,000 करोड़
- आदिवासी विकास विभाग: ₹ 9,881 करोड़
- जल संसाधन विभाग: ₹ 7,000 करोड़
- ग्रामीण विकास विभाग (RDD): ₹ 1,181 करोड़
- पर्यटन विभाग: ₹ 1,100 करोड़
लंबे समय से अटके इन भुगतानों के चलते राज्य में चल रहे विकास कार्यों पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है और अब ठेकेदारों ने सरकार से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है.
मालूम हो कि अप्रैल में महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार संघ (MSCA) ने सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि अगर बकाया जल्द नहीं भरा गया, तो 7 अप्रैल से सभी सरकारी निर्माण कार्य रोक दिए जाएंगे. पिछले साल सरकार ने करीब 20,000 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन नए बिल और कामों के कारण बकाया बढ़कर 96,400 करोड़ रुपए पहुंच गया है.
इसमें लोक निर्माण, जलजीवन मिशन, ग्रामीण विकास, पर्यटन और जल संसाधन विभाग के बिल शामिल हैं। लगभग तीन लाख ठेकेदार अब बकाया भुगतान न होने की वजह से परेशान हैं. MSCA के अध्यक्ष मिलिंद भोसल ने कहा कि अगर जल्द भुगतान शुरू नहीं हुआ तो काम रोक दिया जाएगा.





