

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के प्रसिद्ध भीमताल में स्थित श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल है. कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में गिने जाने वाले इस स्थान का पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों तरह का बड़ा महत्व है. पौराणिक मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस दिव्य शिवलिंग की स्थापना की थी. शांत झील के किनारे बसे इस मंदिर का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा है. चलिए आपको बताते हैं नैनिताल के भीमेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास और पौराणिक महत्व.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सोशल मीडिया पर मंदिर का एक वीडियो शेयर किया. सीएम धामी ने मंदिर का भव्य वीडियो पोस्ट कर लिखा, “नैनीताल जिले के भोवाली में मौजूद श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर कई भक्तों की आस्था का केंद्र है. माना जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां एक दिव्य शिव लिंगम की स्थापना की थी. महा शिवरात्रि समेत कई त्योहारों पर यहां खास पूजा और रस्में की जाती हैं. अगर आप श्रावण महीने में नैनीताल जिले में आ रहे हैं, तो भीमेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करें”.
महाभारत के भीम पर पड़ा मंदिर का नाम
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर का नाम महाभारत के भीम के नाम पर पड़ा है. स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार भीम अकेले हिमालय की यात्रा पर निकले थे. तभी आकाश से एक दिव्य आवाज आई. आवाज ने कहा, “अगर तुम चाहते हो कि लोग तुम्हें हमेशा याद रखें, तो भक्ति भाव से भगवान शिव का मंदिर बनाओ”. भीम शिव के सच्चे भक्त थे, इसलिए उन्होंने उसी जगह पहाड़ से शिव मंदिर बना दिया. भीम बहुत ताकतवर थे, उनमें 100 हाथियों जितनी ताकत थी. उन्होंने अपने गदा से पहाड़ तोड़ दिया. वहां से गंगा की धारा निकली और उसी पानी से भीमताल झील बनी. इसके बाद भीम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की.
जनपद नैनीताल के भीमताल में स्थित श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां दिव्य शिवलिंग की स्थापना की थी। महाशिवरात्रि सहित विभिन्न पर्वों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 17, 2026
पौराणिक कथा और महत्व
पांडवों का आगमन- मान्यता है कि अज्ञातवास के समय पांडव इन हिमालयी क्षेत्रों में आए थे. पांडू पुत्र भीम ने भगवान शिव की आराधना के लिए यहां इस दिव्य शिवलिंग को स्थापित किया था.
भीमताल झील का निर्माण- लोक कथाओं के अनुसार, भीम ने अपनी गदा के प्रहार से यहां जल स्रोत प्रकट किया था, जिससे इस क्षेत्र में भीमताल झील का निर्माण हुआ.
स्वयंभू और प्राचीन स्वरूप- यहां का शिवलिंग अत्यंत चमत्कारी और प्राचीन माना जाता है. भक्त दूर-दूर से आकर यहां रुद्राभिषेक और विशेष पूजा करते हैं.
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