
नई दिल्ली:
आज किसी फिल्म या गाने में एक्ट्रेस का स्विम सूट में नजर आना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन एक दौर ऐसा था कि अगर सीन के लिए जरूरी हो तो भी डायरेक्टर इस तरह के सीन से बचने या इन्हें सुसंस्कारी ढंग से पेश करने की कोशिश करते थे. आज हम आपको एक ऐसे ही हिंदी गाने के बारे में बताने जा रहे हैं. ये गाना वॉटर स्पोर्ट्स करते हुए शूट किया गया था. गाने के विजुअल के हिसाब से एक्ट्रेस बिकिनी पहनना चाहती थीं लेकिन डायरेक्टर सेंसर बोर्ड की चिंता सता रही थी. हम यहां जिस गाने की बात कर रहे हैं वह साल 1967 में आई फिल्म ‘एन ईवनिंग इन पैरिस’ का है. इस फिल्म में शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर लीड रोल में थे. जिस गाने ने डायरेक्टर की टेंशन बढ़ाई थी वह गाना था ‘आसमान से आया फरिश्ता प्यार का सबक सिखलाने’. वीडियो पर बात करने से पहले बात करते हैं उन कलाकारों की जिन्होंने पर्दे के पीछे काम कर इस गाने की नींव रखी.
प्यार, मस्ती और छेड़छाड़ वाली फीलिंग्स को शब्दों में पिरोया हसरत जयपुरी ने, संगीत से सजाया शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने और मोहम्मद रफी ने मजेदार अंदाज में इसे गाकर चार चांद लगा दिए. इस गाने को आइकॉनिक बना गए स्क्रीन पर नजर आए शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर. शम्मी कपूर चाहते थे कि वह इस गाने के लिए हेलिकॉप्टर से लटकते हुए आए. डायरेक्टर शक्ति सामंत तुरंक राजी हो गए. लेकिल शर्मिला टैगोर कुछ ऐसा सुझाव दे रही थीं जो मानना डायरेक्टर के लिए मुश्किल हो रहा था. गाना वॉटर स्पोर्ट्स करते हुए शूट किया जा रहा था. ऐसे में शर्मिला चाहती थीं कि वह इस गाने के लिए बिकिनी पहनें लेकिन डायरेक्टर को सेंसर बोर्ड का डर सता रहा था.

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शक्ति सामंत को लग रहा था कि कहीं ऐसा ना हो कि इस वजह से फिल्म सेंसर बोर्ड में अटक जाए. इसी खयाल से उन्होंने शर्मिला टैगोर को स्विम सूट पहनने का सुझाव दिया. किसी तरह तमाम चैलेंजेस के बीच ये गाना शूट हुआ और शर्मिला टैगोर का स्विम सूट लुक भी काफी चर्चा में रहा था. इस गाने पर काफी बवाल मच गया था. लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की आपत्ति दर्ज कराई थी. ऐसे में जब शर्मिला ने टेलीग्राम देकर पति नवाब पटौदी को इस बारे में जानकारी दी तो उनका जवाब आया, ‘मुझे यकीन है कि आप बहुत अच्छी लग रही होंगी’.
An Evening in Paris का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
एन ईवनिंग इन पैरिस(1967) ने भारत में लगभग 1.50 करोड़ रुपये की कमाई की. उस समय के हिसाब से यह एक हिट फिल्म मानी गई. शंकर-जयकिशन का म्यूजिक और विदेशी लोकेशन (पेरिस, बेरुत आदि) इसकी बड़ी ताकत थे. यह गाना आज भी उतना ही फ्रेश और रोमांटिक लगता है जितना 1960 के दशक में था. रफी साहब की आवाज, शम्मी की मस्ती और शर्मिला की खूबसूरती ने इसे अमर बना दिया.





