

देश में डिजिटल निवेश (Digital Investment) की रफ्तार भले ही रॉकेट की तरह भाग रही हो, लेकिन जब बात पैसे लगाने की आती है, तो भारतीय निवेशक आज भी सिर्फ कुछ चुनिंदा और पुराने रास्तों पर ही सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं. मंगलवार को जारी ‘रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स’ (Redseer) की एक ताजा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एक औसत डिजिटल निवेशक अपने हर 100 रुपये में से 80 रुपये (यानी करीब 80% संपत्ति) सिर्फ तीन विकल्पों-सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), डायरेक्ट इक्विटी (शेयर बाजार) और म्यूचुअल फंड में लगा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में निवेशकों की संपत्ति का दायरा लगातार बड़ा हो रहा है. आज की तारीख में एक औसत डिजिटल निवेशक का एवरेज पोर्टफोलियो साइज 10 लाख रुपये तक पहुंच गया है. यही नहीं, ये निवेशक हर साल औसतन 3 लाख रुपये का नया निवेश अपने पोर्टफोलियो में जोड़ रहे हैं.
100 में 37 रुपये SIP में, 32 रुपये शेयरों में … बाकी कहां?
रेडसीर की रिपोर्ट बताती है कि निवेशकों के कुल पैसे में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 37% केवल SIP में जा रहा है. इसके बाद दूसरे नंबर पर 32% हिस्सेदारी डायरेक्ट इक्विटी (शेयरों) की है और बाकी हिस्सा म्यूचुअल फंड्स में एकमुश्त निवेश के रूप में लगा है. इन तीनों को मिलाकर कुल निवेश का करीब 80% हिस्सा बनता है. बाकी बचे 20 रुपये अन्य पारंपरिक या लिक्विड विकल्पों में जा रहे हैं.
नए प्रोडक्ट्स की जानकारी तो है, पर दांव लगाने से बच रहे निवेशक
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय निवेशकों को नए जमाने के निवेश विकल्पों जैसे- ईटीएफ (ETFs), ग्लोबल इक्विटीज (विदेशी शेयर), मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) और लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज के बारे में अच्छी-खासी जानकारी है. लेकिन, जानकारी होने के बावजूद वे इनमें पैसा लगाने से कतरा रहे हैं और निवेश में इन्हें प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं.
रिपोर्ट ने निवेशकों को तीन कैटगरी में बांटा है:
- गाइडेड सेवर्स: जो निवेश को लंबी अवधि की सुरक्षित बचत मानते हैं.
- एस्पायरिंग इन्वेस्टर्स: जो धीरे-धीरे संभलकर कदम आगे बढ़ा रहे हैं.
- कॉन्फिडेंट बिल्डर्स: जो बाजार के हर मौके का फायदा उठाना जानते हैं.
जीरो ब्रोकरेज नहीं, ‘भरोसा’ है सबसे बड़ा फैक्टर
इस रिपोर्ट से डिस्काउंट ब्रोकर्स और निवेश प्लेटफॉर्म्स को एक बड़ा सबक मिला है. आज का निवेशक अब सिर्फ मुफ्त या कम ब्रोकरेज के पीछे नहीं भागता. करीब दो-तिहाई (66%) निवेशकों का साफ कहना है कि कोई दूसरा प्लेटफॉर्म अगर उन्हें ‘जीरो ब्रोकरेज’ का ऑफर भी दे, तो भी वे अपना मौजूदा प्लेटफॉर्म नहीं बदलेंगे.
निवेशक अब सस्ती स्कीमों से ज्यादा प्लेटफॉर्म के भरोसे, ब्रांड की साख, आसान यूजर इंटरफेस और एक ही जगह पर पूरा पोर्टफोलियो दिखने की सुविधा को तवज्जो दे रहे हैं. रेडसीर के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया का कहना है कि भविष्य में वही निवेश प्लेटफॉर्म सबसे ज्यादा सफल (ज्यादा AUM वाले) होंगे, जो निवेशकों का भरोसा जीतकर उन्हें नए विकल्पों को आसानी से समझा सकेंगे.





