
हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष सेब उत्पादन पर प्रतिकूल मौसम का गहरा असर देखने को मिल रहा है. सेब सीजन अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन 13 सितंबर तक राज्य की मंडियों में एक करोड़ पेटी सेब की आवक भी नहीं हो सकी.
बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 13 सितंबर तक प्रदेश की विभिन्न मंडियों में केवल 91.20 लाख पेटी सेब पहुंचा है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा करीब 1.62 करोड़ पेटी था। इस तरह इस बार मंडियों में 70.80 लाख पेटी कम सेब पहुंचा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है.
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कम और मध्यम ऊंचाई वाले बागों पर सबसे ज्यादा असर
इस बार उत्पादन में कमी का सबसे अधिक असर कम और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बागवानों पर पड़ा है। सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी न होने से पेड़ों को आवश्यक ठंड और नमी नहीं मिल सकी. इसके बाद मार्च-अप्रैल में फूल आने के दौरान हुई बारिश और बर्फबारी तथा फ्रूट सेटिंग के समय पड़े ओलों और ठंड ने फसल को नुकसान पहुंचाया. मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
हालांकि, अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है और वहां अभी भी सेब की तुड़ान जारी है. ऐसे में आने वाले दिनों में मंडियों में कुछ और आवक बढ़ने की संभावना बनी हुई है.
15 साल के निचले स्तर तक पहुंच सकता है उत्पादन
मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इस बार प्रदेश का कुल सेब उत्पादन पिछले डेढ़ दशक के निचले स्तर के करीब पहुंच सकता है. वर्ष 2011 में हिमाचल में करीब 1.38 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था, जबकि वर्ष 2010 में रिकॉर्ड 5.11 करोड़ पेटी उत्पादन दर्ज किया गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम उत्पादन का आकलन सीजन समाप्त होने के बाद ही संभव होगा, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों की फसल अभी मंडियों तक पहुंचनी बाकी है.
पिछले वर्ष हुआ था 3.51 करोड़ पेटी उत्पादन
वर्ष 2025 में हिमाचल में करीब 3.51 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था. इसके मुकाबले इस वर्ष अब तक की मंडी आवक काफी पीछे चल रही है. उत्पादन में कमी का असर केवल बागवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, पैकेजिंग, आढ़तियों और सेब कारोबार से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है.
अच्छे दामों से मिली कुछ राहत
उत्पादन में गिरावट के बावजूद बाजार में सेब के अच्छे दाम मिलने से बागवानों को कुछ राहत जरूर मिली है. सीजन की शुरुआत में उच्च गुणवत्ता वाले सेब को 5,000 से 5,500 रुपये प्रति पेटी तक के भाव मिले. वर्तमान में ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आ रहे बेहतर गुणवत्ता के सेब 1,800 से 2,800 रुपये प्रति पेटी के बीच बिक रहे हैं.
ठियोग के बागवान महेंद्र वर्मा का कहना है कि इस बार फसल काफी कम रही है, लेकिन अच्छे बाजार भाव के कारण नुकसान की कुछ भरपाई हो रही है. उनका कहना है कि उत्पादन में कमी से आय प्रभावित हुई है, फिर भी बेहतर दामों ने राहत प्रदान की है.
अंतिम आंकड़ों पर टिकी नजर
फिलहाल प्रदेश के बागवानों और बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोगों की निगाहें ऊंचाई वाले इलाकों में जारी तुड़ान और आने वाले दिनों की मंडी आवक पर टिकी हैं. सीजन समाप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हिमाचल में कुल सेब उत्पादन कितना रहा और मौसम की मार का प्रदेश की सेब अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ा.
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