
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे चुका है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश के सात जिलों में मानसून सक्रिय हो गया है. इस बार मानसून सामान्य तारीख 25 जून से करीब एक सप्ताह देरी से पहुंचा है.
मौसम विभाग के मुताबिक किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, शिमला और मंडी के अधिकांश इलाकों में मानसून पहुंच चुका है. कांगड़ा और सिरमौर के कुछ क्षेत्रों में भी मानसूनी गतिविधियां शुरू हो गई हैं. बुधवार सुबह से ही प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और गर्मी से राहत मिली है.
2 से 4 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. 2 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा में ऑरेंज अलर्ट, 3 जुलाई: ऊना, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश तो 4 जुलाई को शिमला समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है. इसके अलावा प्रदेश भर में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान है.
भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा
लगातार बारिश से नालों-गड्ढों और छोटी नदियों में जल स्तर तेजी से बढ़ सकता है. पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़कें बंद होने की आशंका है. कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर और सिरमौर जैसे संवेदनशील जिलों में यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है.
लोगों के लिए जारी एडवाइजरी
मौसम विभाग और जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम में नदी-नालों के किनारे न जाएं. अनावश्यक यात्रा टालें और सड़क की स्थिति पहले जांच लें. आकाशीय बिजली के दौरान खुले में न रहें और ऊंचे पेड़ों, बिजली खंभों से दूर रहें. भूस्खलन वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतें.
मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है. अगर बारिश का सिलसिला जारी रहा तो निचले इलाकों में जलभराव और ऊपरी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं. किसानों और पर्यटकों को सतर्क रहने की जरूरत है.
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