मध्य प्रदेश

सोनम रघुवंशी को मिली जमानत, अब राजा रघुवंशी के परिवार ने लिया ये बड़ा फैसला


इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी मामले में आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है. अब मृतक राजा रघुवंशी के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला कर लिया है. मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने कहा कि हम इसमें अब हाई कोर्ट में अपील नहीं करेंगे. अब हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. उन्होंने कहा कि हम जल्द से जल्द सोनम रघुवंशी की जमानत को खारिज करने की अपील करेंगे.

कहीं न कहीं पेपर का हेरफेर हुआ- विपिन रघुवंशी

राजा रघुवंशी के भाई ने कहा, “मेरा मानना ये है कि जिस वक्त गाजीपुर पुलिस ने सोनम रघुवंशी को पकड़ा था तो उस समय उसको बताया जरूर होगा (गिरफ्तारी की वजह). जब पुलिस किसी आरोपी को उठाती है तो उसको बताती है कि आरोप क्या है. ये तो लड़की है तो इसको बताया जरूर होगा. डॉक्यूमेंट भी साइन किए होंगे. जो लड़की मर्डर करके पुलिस को इतना गुमराह कर सकती है, उस लड़की बिना पूछताछ के पुलिस तो उठा नहीं सकती. इसमें कहीं न कहीं पेपर का हेरफेर हुआ है. पुलिस से इतनी बड़ी चूक नहीं हुई होगी. आज इसी वजह से सोनम रघुवंशी बाहर है.”

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सोनम के वकील को पैसा मिल रहा होगा- विपिन

इसके आगे उन्होंने कहा, “सोनम रघुवंशी के सरकारी वकील को कहीं न कहीं पैसा मिल रहा होगा इसलिए वो एक साल से लगातार मेहनत कर रहा है. लेकिन हमारे सरकारी वकील को किसी तरह से पैसे की सहायता नहीं मिली है. इसी कारण हमें लग रहा है कि वकील साहब वहां पर कुछ बोल नहीं पा रहे हैं.” 

निचली अदालत की जमानत का फैसला बरकरार

मेघालय हाई कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा. न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की एकल पीठ ने राज्य सरकार की उस आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 27 अप्रैल को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत रद्द करने का अनुरोध किया था.

न्यायमूर्ति डिएंगदोह ने कहा कि गिरफ्तारी का आधार तैयार करने का तरीका ‘‘न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव’’ को दर्शाता है. अदालत ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि गिरफ्तारी के आधार बिना किसी सोच-विचार के तैयार किया गया… इसमें कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपी के खिलाफ वास्तविक आरोप या विशिष्ट जानकारी क्या है.’’इसने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमानत रद्द करने के लिए अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई आधार नहीं बनता है. 

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