खबर

सुल्तान को गुलाम से हुआ प्यार, जावेद अख्तर के पिता की शायरी, निदा फाजली का साउंडट्रैक, हेमा- धर्मेंद्र का 43 साल पुराना गाना, लता मंगेशकर ने बनाया मास्टरपीस | hema malini Dharmendra 43 years old song Aye Dil E Nadan from Razia Sultan lyrics by Jan Nisar Akhtar suny by Lata Mangeshkar called masterpiece



नई दिल्ली:

Lata Mangeshkar Song: कमाल अमरोही की फिल्म रजिया सुल्तान’ 1983 में बनी एक ऐतिहासिक बायोपिक फिल्म है. इसे कमाल अमरोही ने लिखा और डायरेक्ट किया था और इसमें हेमा मालिनी, परवीन बाबी और धर्मेंद्र लीड रोल में थे. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही, जिसका मुख्य कारण इसकी बहुत ज़्यादा प्रोडक्शन लागत थी. यह उस समय की सबसे महंगी भारतीय फिल्म थी. एन.बी. कुलकर्णी ने बेस्ट आर्ट डायरेक्शन के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता, जो इस फिल्म के लिए एकमात्र जीत थी. खय्याम को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के लिए फिल्मफेयर नॉमिनेशन मिला. फिल्म के गाने के बोल जान निसार अख्तर ने लिखे थे. याकूत जमालुद्दीन (एक अबिसिनियन गुलाम) के रूप में धर्मेंद्र पर फिल्माए गए दो गाने निदा फाजली ने लिखे थे और एक गाना कैफी आजमी ने लिखा था, अख्तर के निधन के बाद दोनों इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे. कुछ गाने लता मंगेशकर ने गाए थे, जिनमें “ऐ दिल-ए-नादान” भी शामिल है. कमाल अमरोही ने 1981-82 के दौरान टोंक में ‘रजिया सुल्तान’ के कुछ सीन शूट किए थे.

“ऐ दिल-ए-नादान” को भारतीय सिनेमा की बेहतरीन गजलों में से एक माना जाता है. इसमें बहुत ही कम संगीत के साथ गहरी उर्दू शायरी का मेल है. कमाल अमरोही की 1983 की ऐतिहासिक फिल्म ‘रजिया सुल्तान’ के लिए महान गायिका लता मंगेशकर द्वारा गाया गया यह गाना, रानी रजिया (हेमा मालिनी ) पर फिल्माया गया है. जो मन की बात यानी आत्म-संवाद को बहुत अच्छे से दिखाता है. इसमें वह अपने दिल के बोझ और अबीसिनियाई योद्धा याकूत को के प्यार को रिजेक्ट करने के बारे में सोचती हैं.

यह भी पढ़ें- गालिब की शायरी से बना मशहूर गाना, इश्क के जुनून को दिखाने के लिए गुलजार ने इस्तेमाल किया शेर, 28 साल बाद भी कविता-सोनू की आवाज में एवरग्रीन

कैसे बना मास्टरपीस गाना 
मशहूर प्रगतिशील उर्दू शायर जान निसार अख्तर द्वारा लिखे गए बोल बेहद खूबसूरत थे. हालांकि  जान निसार अख्तर की निधन के बाद फिल्म के साउंडट्रैक में निदा फाजली ने योदगान दिया. यह एक नासमझ दिल (दिल-ए-नादान) के साथ सीधी बातचीत है.  शायरी में क्लासिक उर्दू रोमांटिक और अस्तित्ववादी रूपकों का इस्तेमाल किया गया है ताकि इच्छा आरजू की उथल-पुथल और लगातार जुस्तजू को दिखाया जा सके. बैकग्राउंड में रेगिस्तान और लहर दिखाया गया है, हम भटकते हैं, क्यों भटकते हैं दश्त-ओ-सहारा में. ऐसा लगता है, मौज प्यासी है अपने दरिया में. हम वीरान इलाकों और रेगिस्तानों में बिना किसी मकसद के क्यों भटकते हैं? ऐसा लगता है जैसे कोई बेचैन लहर अपनी ही नदी में प्यासी रह गई हो.  ब्रह्मांडीय खामोशी, यह जमीन चुप है, आसमान चुप है फिर  चारों तरफ महसूस होने वाली, यह गूंजती हुई धड़कन क्या है. संगीत निर्देशक खय्याम ने जान-बूझकर भारी ऑर्केस्ट्रा से दूरी बनाई, ताकि शायरी खुलकर सामने आ सके. गाने में बहुत कम, लेकिन असरदार वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया है. संतूर की झिलमिलाती धुनें, विशाल खुले रेगिस्तानी नजारों और हिलती हुई रेत का आभास कराती हैं. सारंगी और ढोल का इस्तेमाल गाने के उदास भाव को बढ़ाता है, लेकिन आवाज पर हावी नहीं होता. छंदों के बीच लंबे ठहराव और खामोशी का सोच-समझकर किया गया इस्तेमाल अकेलेपन और सोचने-समझने की स्थिति को और गहरा करता है. लता मंगेशकर का गायन भावनाओं पर संयम रखने का एक बेहतरीन अंदाज गाने में दिखता है. 

यह भी पढ़ें- मंदाकिनी- मिथुन का 38 साल पुराना गाना, शादियों में बरातियों की फेवरेट लिस्ट में शामिल, अनु मलिक- कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में अमर 

फिल्म के बारे में 
यह फिल्म दिल्ली की एकमात्र महिला सुल्तान (1236–1240 के जीवन और अबीसीनियाई गुलाम जमाल-उद-दीन याकूत के साथ उनके कथित प्रेम-संबंध पर आधारित है.

ये Video भी देखें: National Film Awards 2025: नेशनल अवॉर्ड से नवाजे गए Shahrukh Khan-Rani Mukherjee




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button