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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: पटना में गंगा किनारे से हटेंगे अवैध निर्माण, वृंदावन में यमुना के आसपास सख्ती | Supreme Court verdict illegal structures removed ganges patna stays yamuna vrindavan riverfront project



नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने नदियों के अस्तित्व और उनके प्राकृतिक प्रवाह को सही बनाए रखने के लिए सख्ती दिखाई है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी के संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के पावन धाम वृंदावन में यमुना नदी के अंदर हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर बेहद सख्त निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह से पर्यावरण और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि पटना में गंगा पर सभी अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया गया है. इसके अलावा यूपी के वृंदावन में यमुना के भीतर किसी भी तरह के नए निर्माण पर रोक लगा दी गई है. 

गंगा-युमना पर न हो अवैध निर्माण: सुप्रीम कोर्ट

दरअसल, गंगा और उसकी सहायक नदियों को लेकर पटना के रहने वाले अशोक कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जहां सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी अन्य अदालत के ऐसे आदेश से प्रभावित नहीं होगी, जो अवैध निर्माण हटाने में बाधा बन सकता हो. अदालत ने राज्य सरकार को 23 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है. इसके अलावा अशोक कुमार उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गंगा के फ्लडप्लेन पर बढ़ते अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ उनकी मूल याचिका खारिज कर दी गई थी. 

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को दिए निर्देश

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की तरफ से सीनियर वकील आकाश ने अदालत को बताया कि 12 मार्च 2026 के आदेश में सैकड़ों अतिक्रमणों का उल्लेख किए जाने के बावजूद राज्य सरकारों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे. उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी की मुख्य धारा के भीतर हो रहे भारी निर्माण कार्य पर भी चिंता जताई. ब्रज-वृंदावन देवालय समिति की ओर से दाखिल हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई तक यमुना की धारा के भीतर किसी भी नए निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए हैं. 

यमुना की धार प्रभावित हो रही 

समिति की तरफ से वकील शुभम उपाध्याय ने अदालत को बताया कि घाटों के विस्तार के नाम पर कंक्रीट, लोहे और स्टील से नदी के बीच तक निर्माण किया जा रहा है. जिससे यमुना की प्राकृतिक धारा संकरी होती जा रही है और नदी का पारिस्थितिक प्रवाह गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है. इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. 

सुप्रीम कोर्ट ने गंगा बेसिन से जुड़े सभी राज्यों में नदी अतिक्रमण की स्थिति की व्यापक समीक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश को भी मामले में पक्षकार बनाया है. अदालत ने सभी राज्यों को नदियों पर अतिक्रमण, फ्लडप्लेन के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि समय पर जानकारी नहीं देने पर संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया जा सकता है.

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