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वो अग्निवीर जो भारतीय सेना में बना अफसर, T-90 टैंक गनर से OTA तक ऐसे पहुंचे विकास गौतम | agniveer to Indian army officer suo vikas gautam success story



Agniveer Ssuccess Story: यह सक्‍सेस स्‍टोरी भारतीय सेना के उस अग्निवीर विकास गौतम की है, जिसने अपने सपने को हकीकत में बदला है. विकास ने भारतीय सेना में अग्निवीर से अफसर बनने तक का सफर तय किया है. अग्निवीर के रूप में T-90 टैंक गनर से ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) तक का विकास गौतम का सफर बेहद गर्व करने लायक है.

हिमाचल के छोटे से गांव से तय किया सेना का सफर

सेना प्रशिक्षण कमान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से विकास गौतम की कहानी साझा करते हुए बताया कि विकास मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के एक गांव के रहने वाले हैं. वह एक छोटे से गांव से निकलकर पहले भारतीय सेना में अग्निवीर बने और अब सीनियर अंडर ऑफिसर पद तक पहुंचे हैं.

कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग के बाद जॉइन की सेना

बचपन से भारतीय सेना में शामिल होने का ख्वाब देखने वाले विकास गौतम ने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने बतौर अग्निवीर भारतीय सेना जॉइन की. अग्निवीर के रूप में उन्हें आर्मर्ड कॉर्प्स की प्रतिष्ठित रेजीमेंट ‘द सिंध हॉर्स (14 हॉर्स)’ में T-90 टैंक गनर के रूप में सेवा देने का मौका मिला.

रेजीमेंट में तैनाती के दौरान मजबूत हुआ अफसर बनने का संकल्प

अग्निवीर के रूप में रेजीमेंट में तैनाती के दौरान अनुशासन, टीम वर्क और देश सेवा के प्रति उनका जज्बा और गहरा हुआ, जिसके बाद विकास ने भारतीय सेना में ही अधिकारी बनने की ठानी. देश सेवा और वर्दी पहनने का अपना सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू पास करके ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया में प्रवेश पाने में सफलता हासिल की.

OTA गया में बनाए नए रिकॉर्ड, हासिल किए स्वर्ण पदक

OTA गया में प्रशिक्षकों और वरिष्ठ कैडेटों के मार्गदर्शन ने उनके आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल को और अधिक निखारने का काम किया. ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया में क्रॉस कंट्री में अकादमी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त किया. इसके अलावा, फिजिकल ट्रेनिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें मेरिट कार्ड से सम्मानित किया गया तथा बैटल ऑब्स्टैकल कोर्स में नया रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने अकादमी के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया.  

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