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सैयद सोहेल का शो: सुरंग के अंदर कोई कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है? | How long can someone survive inside a tunnel



नेपाल त्रासदी सभी देख चुके हैं, सामने आए कई वीडियो में तबाही का मंजर भी दिखा है. लेकिन अब इस समय जारी रेस्क्यू ऑपरेशन से सामने आ रही हैं कि चमत्कार, उम्मीद और इंसानियत की तस्वीरें. एक दूसरे का कैसे सहारा बना जाए, कैसे एक दूसरे की मदद की जाए, अब बस इसी आधार पर इन मुश्किल स्थिति में रेस्क्यू चलाया जा रहा है. 

गुरुवार को नेपाल से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई जहां पर सुरंग में फंसे दो मजदूरों को 9 दिनों के संघर्ष के बाद जिंदा बाहर निकाला गया. जिस सुरंग में किसी के भी बचे रहने की उम्मीद नहीं लग रही थी, वहां दो थमती सांसों को बचा लिया गया था. लेकिन इस बीच एक सवाल और सभी के मन में आया. मलबे या सुरंग में फंसने के बाद सबसे एक इंसान कितने समय तक जिंदा रह सकता है?

अब इसका कोई एक सरल जवाब नहीं है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है कि सिर्फ खाना होने का मतलब है कि वो इंसान जिंदा बच जाएगा. इस प्रकार की स्थिति में बचे रहने के लिए सबसे पहले जरूरत होती है हवा और पानी की. अगर सुरंग के बाहर से मलबे का बहाव तेज रहता है, उस स्थिति में ऑक्सीजन कम हो जाती है. ऐसे हाल में किसी के भी बचे रहने की संभावना कम हो जाती है. 

अब अगर किसी को हवा मिल भी जाए तो दूसरी चुनौती रहती है पानी.ऐसा देखा गया है कि बिना खाने के इंसान कई हफ्तों तक जिंदा रह सकता है, लेकिन बिना पानी के ज्यादा दिन तक बचे रहना आसान नहीं है. आम तौर पर मलबे के नीचे फंसा किसी शख्स को अगर खाना और पानी दोनों ना मिले तो वो पांच से सात दिन ही जिंदा रह सकता है. 

अगर मलबे के बीच कहीं से हवा आ रही हो, और पानी भी कुछ हद तक मिल जाए तो बचने की संभावना ज्यादा रहती है. इसी वजह से देखा गया है कि किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन के वक्त फंसे लोगों तक पाइप या किसी दूसरे रास्ते से हवा, पानी और खाना पहुंचाया जाता है.

वैसे ऐसी मिसाल उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में देखने को मिल चुकी है. वहां तो 41 मजदूर सुरंग के अंदर फंस गए थे। तब रेस्क्यू के दौरान पाइप से ऑक्सीजन, खाना और पानी पहुंचाया जा रहा था. करीब 17 दिन की कोशिश के बाद उन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था.

वैसे सुरंग में हालात ऐसे रहते हैं कि हर बार सिर्फ हवा और पानी होने से भी बचने की पूरी गारंटी नहीं दी जा सकती. अगर सुरंग में बाढ़ का पानी और कीचड़ भर जाए और दलदल जैसी स्थिति दिखे तो डूबने का खतरा उतना ज्यादा बढ़ जाता है.  इसके अलावा शरीर का तापमान बहुत कम पर हाइपोथर्मिया का खतरा भी रहता है. इसका मतलब है कि शरीर इतना ठंडा हो जाए कि सामान्य कामकाज करना भी मुश्किल होने लगे.

अब एक और शर्त भी रहती है, अगर सुरंग में मौजूद शख्स जख्मी भी है तो उस स्थिति में उसके बचने की उम्मीद भी कम हो जाती है. ज्यादा खून बहने की स्थिति में तो जान कुछ घंटों में भी जा सकती है. ऐसे में सुरंग में फंसे किसी भी शख्स के लिए हर मिनट मायने रखता है. वहां कैसी स्थिति है इस पर भी निर्भर करता है कि जिंदगी बचे रहने की संभावना कितनी ज्यादा है.





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