

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. अब अदालत में खुद अपना पक्ष रखने वाले पक्षकारों (पार्टी-इन-पर्सन) को सामान्यतः वर्चुअल माध्यम से बहस करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. यदि कोई पक्षकार व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर बहस करने पर जोर देता है, तो उसकी कार्यवाही की न तो लाइव स्ट्रीमिंग होगी और न ही वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी.
यह फैसला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की पूर्ण पीठ (फुल कोर्ट) की बैठक में लिया गया, जिसकी जानकारी गुरुवार को आधिकारिक बयान के जरिए दी गई. 10 जुलाई को कोर्ट रूम में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान कागज फेंके, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डाली. इस मामले में सुरक्षा कर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोप में लॉ के दो छात्रों को भी गिरफ्तार किया गया था.
कार्यवाही का प्रसारण या रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रजिस्ट्रार के साथ प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान पार्टी-इन-पर्सन को वर्चुअल माध्यम से अपनी बात रखने का विकल्प दिया जाएगा. हालांकि, यदि कोई पक्षकार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की मांग करता है, तो उसकी कार्यवाही का प्रसारण या रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी. अदालत का मानना है कि इससे अदालत की गरिमा बनी रहेगी और व्यवधान पैदा करने वाली घटनाओं को सार्वजनिक मंचों पर अनावश्यक प्रचार नहीं मिलेगा.
फुल कोर्ट ने लंबित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए है. इसके तहत लगभग 100 ऐसे ‘बंच मामलों’ की पहचान की जाएगी, जो अंतिम सुनवाई के लिए तैयार हैं. इन मामलों के निपटारे से करीब 9,177 लंबित मामलों का निपटारा होने की उम्मीद है.
इसके बाद नोटिस जारी हो चुके सबसे पुराने लंबित मामलों की सुनवाई प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को की जाएगी. यह व्यवस्था मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा हाल ही में लागू किए गए विशेष रोस्टर का हिस्सा है, जिसके तहत चार विशेष डिवीजन बेंच केवल पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई कर रही हैं. अब तक लगभग 800 पुराने मामलों की पहचान की जा चुकी है
न्यायाधीशों की एक समिति गठित करने का भी निर्णय
कोर्ट ने दैनिक कॉज लिस्ट को सरल और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए न्यायाधीशों की एक समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है. साथ ही, अंतिम सुनवाई वाले मामलों में वकीलों द्वारा अपनी मौखिक दलीलों के लिए पहले से समय-सीमा बताने की व्यवस्था भी जारी रहेगी, ताकि मामलों का बेहतर प्रबंधन हो सके और अदालत के समय का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सके. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के सभी जज 21 से 23 अगस्त, 2026 तक आयोजित होने वाले ‘समाधान समारोह’ और विशेष लोक अदालत में भाग लेंगे. इसका उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों के समाधान को बढ़ावा देना है.
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