

भारत अपने रक्षा क्षेत्र को लगातार मजबूत कर रहा है. भारत के पास पहले से ब्रह्मोस और अग्नि जैसी खतरनाक मिसाइलें हैं. अब भारत एक और एडवांस मिसाइल अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है. इस मिसाइल के लिए अमेरिका के साथ डील भी फाइनल हो गई है. पहले इसे अमेरिका से खरीदने की चर्चा थी, लेकिन अब अमेरिकी कंपनी की साझेदारी से भारत में ही इसे डेवलेप किया जाएगा. हम बात कर रहे हैं ‘जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल’ की. यह मिसाइल लद्दाख से लेकर एलओसी तक दुश्मनों के टैंकों का काल बनेगी. भारत इस मिसाइल को ऊंचे इलाकों में तैनात करेगा.
अमेरिकी राजदूत ने किया ऐलान
जैवलिन मिसाइल को लेकर भारत और अमेरिका की डील की घोषणा खुद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के बीच भारत में जैवलिन मिसाइल बनाने को लेकर समझौता हुआ है.राजदूत गोर ने कहा कि इस समझौते के बाद अमेरिकी जैवलिन मिसाइल का निर्माण भारत में किया जाएगा. इस सहयोग से अमेरिकी रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा.
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को जेवलिन जॉइंट वेंचर (जोजेवी) ने कई कंपनियों की काबिलियत और एक्सपर्टीज के आधार पर इवैल्यूएशन के बाद भविष्य में देश में को-प्रोडक्शन की कोशिशों के लिए प्राइम पार्टनर के तौर पर चुना है. इंडस्ट्री एमओयू के तहत, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और जोजेवी भारत में जैवलिन ऑल-अप-राउंड के लिए फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी बनाने और कंपोनेंट बनाने की क्षमताओं पर विचार करेंगे.
क्यों खास है जैवलिन मिसाइल?
भारत द्वारा अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने पर रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल बख्शी ने इसकी खासियत बताई है. उन्होंने कहा कि भारत की सीमाएं पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से लगती हैं जहां टैंक की लड़ाइयां आम हैं, ऐसे में 4.5 किमी रेंज वाली यह गाइडेड मिसाइल बेहद असरदार है जो 150 मीटर ऊपर जाकर सीधे टैंक और बिल्डिंग पर हमला करती है.
उन्होंने कहा कि भारत की सीमा बहुत बड़ी है, पाकिस्तान, बांग्लादेश, और चीन के साथ है. टैंक की लड़ाइयां बहुत आम हैं और वे हुई हैं. हमने इसे यूक्रेन में, इराक में, 1971 की लड़ाई में, 1965 में, खेमकरण, वगैरह में देखा है. इन टैंक लड़ाइयों में, जब दुश्मन का टैंक आता है, तो आप उसे या तो टैंक से, टैंक गन से, या एंटी-टैंक हथियारों से खत्म कर देते हैं. एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल बहुत असरदार होती है.
दुश्मन के टैंक को कर सकती है तबाह
जब टैंक आ रहा होता है, तो उसे तबाह करने के लिए गाइडेड मिसाइल दागी जाती है. इस मिसाइल की रेंज 4.5 किलोमीटर है. जब सामने से टैंक आ रहा है, तो मिसाइल फायर करते हैं. इसका हाई अटैक मोड होता है. ये 150 मीटर ऊपर तक जाता है और सीधा नीचे हमला करता है. इससे आप बिल्डिंग्स को भी निशाना बना सकते हैं. इसकी बड़ी उपलब्धियां हैं.
भारत के पास पहले से भी हैं खतरनाक मिसाइलें
भारत के पास नाग मिसाइल है, जिसकी रेंज 4 किमी तक है. इसके दो वर्जन होते हैं और ये चलते हुए वाहन से भी दागी जा सकती है. संत मिसाइल भी एयर-लॉन्च है. इससे आप 20 किमी तक के टारगेट को निशाना बना सकते हैं. अमोगा सिस्टम के दो वर्जन हैं. सैमो नाम की एक मिसाइल है, जो टैंक की गन से दागी जा सकती है.
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