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मिडटर्म चुनाव हार गए ट्रंप, तो अमेरिकी विदेश नीति में आ सकते हैं ये 4 बड़े बदलाव | If Trump loses the midterm elections these major changes could occur in US foreign policy



अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव हैं. डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन पूरा जोर आजमा रही है. हालांकि, बराक ओबामा की पार्टी डेमोक्रेट्स के पास भी अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और संभवतः सीनेट जीतने का अच्छा मौका है. अगर ऐसा होता है, तो दो साल तक रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण में रहने के बाद, वाशिंगटन में डेमोक्रेट्स को भी सत्ता में हिस्सेदारी मिल जाएगी. डेमोक्रेट्स का तर्क है कि रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को युद्ध की घोषणा करने और खर्चों को नियंत्रित करने की छूट दे दी है, जबकि अमेरिकी संविधान के अनुसार ये अधिकार केवल कानून निर्माताओं (संसद सदस्यों) के पास होने चाहिए.

अगर ट्रंप ये चुनाव हार जाते हैं तो क्या होगा? क्या इसका दुनिया पर असर पड़ेगा? तो जवाब है-हां. ऐसे ही 4 बड़े बदलाव आप जान लीजिए. 

ईरान के साथ युद्ध पर लगेगी लगाम

28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने से पहले ट्रंप ने कांग्रेस से मंजूरी नहीं ली थी. डेमोक्रेट्स ने बार-बार इस लड़ाई को खत्म करने के पक्ष में वोट किया है, जब तक कि ट्रंप कांग्रेस से मंजूरी न ले लें. इनमें से एक प्रस्ताव कुछ रिपब्लिकन के समर्थन से पास भी हो गया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया.

हाउस या सीनेट पर नियंत्रण होने की स्थिति में, डेमोक्रेट्स रक्षा खर्च में कटौती कर सकते हैं ताकि ट्रंप पर कांग्रेस से युद्ध जारी रखने की अनुमति लेने का दबाव बनाया जा सके. वे प्रशासन के अधिकारियों को अपनी योजनाओं के बारे में सार्वजनिक रूप से गवाही देने के लिए भी मजबूर कर सकते हैं.

यूक्रेन के लिए नया समर्थन

रूस के हमले का सामना कर रहे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी वित्तीय और सैन्य मदद को ट्रंप ने काफी हद तक रोक दिया है, जबकि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के सांसदों का इसे व्यापक समर्थन हासिल है.हाल ही में, उन्होंने रूसी डीजल और ऊर्जा पर लगाए गए प्रतिबंधों को कानून बनाने के कुछ ही हफ्तों के भीतर हटाकर कांग्रेस के सदस्यों (जिनमें कई रिपब्लिकन भी शामिल हैं) को नाराज कर दिया है.

नवंबर में अगर डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में जीत हासिल कर लेते हैं, तो वे यह तय कर सकेंगे कि किस मुद्दे पर और कब वोटिंग होगी. इससे वे यूक्रेन के लिए नई मदद को मंजूरी दिला सकते हैं. संभावना है कि इसे दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा, जो ट्रंप के वीटो को खारिज करने के लिए जरूरी है. 

इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर असर

गाजा युद्ध में इजरायल के बर्ताव के कारण डेमोक्रेट्स के बीच उसे मिलने वाला समर्थन काफी कम हो गया है. इस युद्ध में हजारों फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं. इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में जारी हिंसा और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की रिपब्लिकन पार्टी के साथ करीबी दोस्ती भी इसके कुछ कारण हैं.

डेमोक्रेट्स इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता को सीमित कर सकते हैं या पूरी तरह बंद कर सकते हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में यह सहायता 3.8 अरब डॉलर थी, जो किसी भी अन्य देश को दी गई सहायता से कहीं अधिक है.

इस गर्मी में, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लगभग आधे डेमोक्रेट्स ने इजरायल को दी जाने वाली सहायता रोकने के पक्ष में वोट दिया. वहीं, जिन लोगों ने इस कदम का विरोध किया था, उनमें से कुछ (जैसे मीक्स) ने इजरायल को भारी बम जैसे हथियार देने पर कुछ पाबंदियां लगाने का समर्थन किया है.

सैन्य खर्च सीमित होगा और विदेशी सहायता बहाल होगी

ट्रंप के रिपब्लिकन की तुलना में डेमोक्रेट्स द्वारा सैन्य खर्च को सीमित किए जाने की संभावना कहीं अधिक है. इस साल ट्रंप ने सैन्य बजट में 67% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी करके इसे 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की मांग की थी, लेकिन डेमोक्रेट्स ने सीनेट में इसे रोक दिया. उन्होंने इसके पीछे कारण यह बताया कि ट्रंप ने ईरान युद्ध के मामले में कांग्रेस से सलाह नहीं ली थी और उन्होंने सामाजिक कार्यक्रमों के बजट में भारी कटौती की थी.

ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा मंजूर की गई अरबों डॉलर की विदेशी सहायता को भी रोक दिया है या रद्द कर दिया है. कई डेमोक्रेट्स इस कटौती से नाराज हैं और उनका कहना है कि वे इस फंडिंग को फिर से बहाल करने की कोशिश करेंगे.

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