
Meerabai Jayanti 2026: मीराबाई जयंती आज सोमवार 26 अक्टूबर को मनाई जा रही है. कृष्ण भक्ति को समर्पित इस दिन घर पर भगवान कृष्ण की पूजा, भजन और मीरा के पदों का पाठ किया जा सकता है. पंचांग के अनुसार आज पूर्णिमा तिथि सुबह 9:41 बजे तक है. ऐसे में पूर्णिमा में पूजा करने वाले श्रद्धालु सुबह का समय चुन सकते हैं.
मीरा की भक्ति में अपने आराध्य के प्रति अटूट प्रेम दिखाई देता है. उनकी जयंती पर श्रद्धालु कृष्ण का स्मरण करते हैं और भजन-कीर्तन के जरिए उन्हें याद करते हैं. घर पर इस दिन पूजा कैसे करें और समय चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखें, जानिए.
मीराबाई जयंती पर पूजा का समय
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, 26 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक है. ये समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं. दूसरे शहरों में स्थानीय पंचांग देखें.
यहां एक बात स्पष्ट है. अभिजीत उस दिन का सामान्य शुभ मुहूर्त है, मीराबाई जयंती का अलग से निर्धारित विशेष पूजा मुहूर्त नहीं. इस जयंती पर पूजा और भजन के लिए किसी एक समय की अनिवार्यता नहीं बताई गई है. पूर्णिमा तिथि में पूजा करनी हो तो सुबह 9:41 बजे से पहले करें. इसके बाद भी कृष्ण पूजा और मीरा के भजन किए जा सकते हैं.
घर पर कैसे करें कृष्ण पूजा?
घर में प्रचलित कृष्ण पूजा की सरल विधि अपना सकते हैं. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान साफ करें. भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. मीराबाई का चित्र उपलब्ध हो तो उनके भक्तिभाव का स्मरण करें. चित्र न होने पर भी पूजा कर सकते हैं.
अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कृष्ण को चंदन, फूल और तुलसी दल अर्पित करें. भोग में फल, मिश्री या घर में बनी सात्विक मिठाई रख सकते हैं. सामग्री जुटाने के लिए पूजा को जटिल बनाने की जरूरत नहीं है.
इसके बाद कृष्ण नाम का जप करें. मीरा के पद पढ़ें या उनके भजन सुनें. परिवार के साथ कुछ समय भजन-कीर्तन भी कर सकते हैं. अंत में अपने घर की परंपरा के अनुसार आरती करें और प्रसाद बांटें. मीराबाई जयंती के प्रमुख आयोजनों में उनके पदों का गायन, पाठ और कृष्ण मंदिरों में कीर्तन शामिल हैं.
मीराबाई जयंती का धार्मिक महत्व
मीराबाई कृष्ण भक्ति की प्रमुख संत कवयित्री थीं. उनके पदों में कृष्ण से मिलने की चाह, विरह और अपने आराध्य के प्रति समर्पण व्यक्त होता है. उनकी जयंती इसी भक्ति परंपरा को याद करने का अवसर है.
इस दिन मीरा के भजन गाने का महत्व उनके शब्दों के भाव को समझने में भी है. पूजा के साथ कुछ समय कृष्ण स्मरण और पदों के पाठ के लिए निकालें. मीराबाई जयंती मुख्य रूप से भक्ति और स्मरण का दिन है. इसे मनाने के लिए कठोर उपवास जरूरी नहीं है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
