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मंत्रियों के बंगलों पर 92 करोड़ खर्च को लेकर घमासान, कांग्रेस-AAP ने सरकार को घेरा | Opposition Targets Centre Over Rs 92.35 Crore Spent on Union Ministers Bungalows RTI Reveals Record Expenditure



केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव, नवीनीकरण और साज-सज्जा पर पिछले साल हुए रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने कहा है कि आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, लेकिन सरकार को इसकी परवाह नहीं है. वहीं आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं गलत हैं, जबकि देश में महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसी बुनियादी चुनौतियां बनी हुई हैं.

कांग्रेस ने साधा निशाना

कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने बढ़ते खर्च को लेकर सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘2014-15 में 27.47 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो अब बढ़कर 92.35 करोड़ रुपये हो गए हैं. यानी खर्च तीन गुने से भी ज्यादा हो गया. आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहीं है.’

AAP ने केजरीवाल बंगले विवाद से जोड़ा

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने इस मुद्दे की तुलना अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास को लेकर हुए राजनीतिक विवाद से की. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंत्रियों के सरकारी बंगलों पर 92 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, तब इस मुद्दे पर वैसी बहस क्यों नहीं हो रही जैसी दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास को लेकर हुई थी.

CJP ने स्कूलों का मुद्दा उठाया

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने’एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को आलीशान बंगलों पर पैसा खर्च करने के बजाय सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारनी चाहिए. पार्टी ने लिखा, ’92 करोड़ रुपये में 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल बनाए जा सकते हैं. पैसा उपलब्ध है, लेकिन उसे सरकारी विद्यालयों पर खर्च करने की मंशा नहीं है.’

RTI से सामने आया खर्च का आंकड़ा

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव, मरम्मत, नवीनीकरण और साज-सज्जा पर खर्च 2014-15 के 27.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 92.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने 2014-15 से 2025-26 के बीच 12 वर्षों में इन आवासों पर कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

वहीं अधिकारियों के अनुसार, बढ़ते खर्च की एक बड़ी वजह इन बंगलों की उम्र है. दिल्ली के कई मंत्री आवास 80 से 100 साल पुराने हैं और उनमें सीलन, दीमक, पुरानी बिजली व्यवस्था और जर्जर पाइपलाइन जैसी समस्याएं हैं. इनकी मरम्मत और रखरखाव पर स्वाभाविक रूप से अधिक खर्च आता है.

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