

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बेहद पवित्र माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित होता है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है. यह व्रत हर तीन वर्ष में एक बार आता है और इस कारण भक्तों के लिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. आज यानी 11 जून, गुरुवार को परमा एकादशी का व्रत रखा गया, ऐसे में आइए जानते हैं एकादशी व्रत पारण का शुभ समय-
कब किया जाएगा परमा एकादशी व्रत का पारण?
व्रत का पारण अगले दिन यानी 12 जून 2026 को किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, व्रत खोलने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 47 मिनट से सुबह 9 बजे तक रहेगा. हालांकि, पारण द्वादशी तिथि के अंदर ही करना चाहिए. द्वादशी तिथि शाम 4 बजकर 6 मिनट तक रहेगी.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि के आरंभिक भाग को हरिवासर कहा जाता है. इस अवधि में व्रत का पारण करना शुभ नहीं माना जाता. इसलिए हरिवासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए. ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
इस तरह करें व्रत का पारण
पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
इसके बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें और उन्हें तुलसी दल अर्पित करें. तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है.
पूजा पूरी होने के बाद सबसे पहले जल ग्रहण करें या तुलसी का पत्ता खाकर व्रत खोलें.
इसके बाद हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण करें.
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, भक्ति और नियम के साथ किया गया परमा एकादशी व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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