

नई दिल्ली:
हिंदी सिनेमा में प्रेम, दर्द और बिछड़ने पर हजारों गीत लिखे गए, लेकिन वीर रस के ऐसे गीत बहुत कम बने, जो दशकों बाद भी उसी गर्व और जोश के साथ सुने जाते हों. कुछ गानों ने सिर्फ फिल्मों को नहीं, बल्कि इतिहास और वीरता की यादों को भी जिंदा रखा. ऐसा ही एक गीत आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. दिलचस्प बात यह है कि यह गीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा गीतों में भी शामिल है. 1961 में रिलीज हुई फिल्म जय चित्तौड़ का यह गीत महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े चेतक को संबोधित है. ये गीत है- “ओ पवन वेग से उड़ने वाले घोड़े..”
लता मंगेशकर की आवाज, भरत व्यास के लिखे बोल और एस.एन. त्रिपाठी के संगीत ने इसे हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार वीर रस के गीतों में शामिल कर दिया. यह रचना वीरता, त्याग और मातृभूमि के सम्मान की ऐसी कहानी बुनती है, जो आज भी सुनने वालों के मन में वही जोश भर देती है.
पीएम मोदी भी कर चुके हैं इस गीत का जिक्र
साल 2019 में अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पसंदीदा गीतों का जिक्र किया था. उसी दौरान उन्होंने ‘ओ पवन वेग से उड़ने वाले घोड़े’ का नाम भी लिया. यह उस दौर के उन चुनिंदा फिल्मी गीतों में है, जो मनोरंजन के साथ इतिहास और राष्ट्र गौरव की भावना को भी सामने रखते हैं.
गीत में चेतक से उस वीर की लाज रखने की गुहार लगाई गई है, जो युद्धभूमि की ओर बढ़ रहा है.. आगे चलकर गीत मेवाड़ की आन, हल्दीघाटी के युद्ध और महाराणा प्रताप के संघर्ष का चित्र खींचता है. “तेरे कंधों पे आज भार है मेवाड़ का…” और “हल्दीघाटी नहीं है काम कोई खिलवाड़ का…” जैसी पंक्तियां इसे साधारण फिल्मी गीत से कहीं आगे ले जाती हैं.
फिल्म से ज्यादा मशहूर हुआ यह गीत
जय चित्तौड़ महाराणा प्रताप और मुगल सेना के संघर्ष पर बनी थी. फिल्म में निरूपा रॉय ने अहम भूमिका निभाई थी. समय के साथ फिल्म भले उतनी चर्चा में न रही, लेकिन ‘ओ पवन वेग से उड़ने वाले घोड़े’ ने अपनी अलग पहचान बना ली. आज भी जब हिंदी सिनेमा के यादगार वीर रस के गीतों की बात होती है, तो इसका नाम जरूर लिया जाता है.
गीतकार भरत व्यास ने बेहद आसान लेकिन असरदार शब्दों में वीरता और समर्पण की भावना को पिरोया, जबकि संगीतकार एस.एन. त्रिपाठी ने ऐसी धुन तैयार की, जो गीत के भावों को और ऊंचाई देती है. लता मंगेशकर की ओजपूर्ण आवाज ने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
दशकों बाद भी ‘ओ पवन वेग से उड़ने वाले घोड़े’ सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि वीरता, स्वाभिमान और मातृभूमि के सम्मान का प्रतीक माना जाता है. शायद यही वजह है कि यह गीत आज भी नई पीढ़ी को आकर्षित करता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा गीतों में अपनी जगह बनाए हुए है.





