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नौवें महीने की प्रेग्नेंसी में भी सिंगर ने की रिकॉर्डिंग, सनी देओल की फिल्म के गानों को बनाया हिट | Singer recorded songs even while nine months pregnant making tracks for a Sunny Deol film a hit



मल्टी टैलेंटेड सिंगर आनंदी जोशी अपने गुरु ए.आर. रहमान के साथ लगातार काम करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘बटवारा 1947′ के गाने ‘देखिए जहां जाइए कहीं’ में आनंदी ने अपनी आवाज दी है. इस गाने को जावेद अख्तर ने लिखा है और आनंदी के साथ जावेद अली और रब्बानी मुस्तफा खान ने इसे गाया है. यह गाना फिल्म में सनी देओल, प्रीति जिंटा और उनकी बेटी के साथ शबाना जी के रिश्ते की गर्माहट को दिखाता है. बंटवारे की वजह से पैदा हुई दूरियों के बावजूद परिवार उन्हें अपने ही परिवार के सदस्य की तरह अपनाता है. आनंदी के लिए इस गाने का हिस्सा बनना इसलिए भी खास है क्योंकि वह लंबे समय से एआर रहमान को अपना गुरु मानती हैं. ऐसे में भारतीय संगीत के दो दिग्गजों, एआर रहमान और जावेद अख्तर, की रचना का हिस्सा बनना उनके लिए बेहद खास अनुभव है.

‘गांधी टॉक्स’ के गाने पर काम

इससे पहले आनंदी ने एआर रहमान की फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ के गाने ‘जरा जरा मन खुलावते’ में उनके साथ काम किया था, जिसे दर्शकों और संगीत प्रेमियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली. रहमान और जावेद अख्तर की जोड़ी ने कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों पर गहरा प्रभाव छोड़ा है और ऐसे में उनके साथ काम करना आनंदी के लिए खास मायने रखता है. दिलचस्प बात यह है कि ‘देखिए जहां जाइए कहीं’ का सफर आनंदी की जिंदगी के एक बेहद खास दौर के साथ भी जुड़ा हुआ है. उन्होंने यह गाना तब रिकॉर्ड किया था, जब उन्हें पता चला कि वह प्रेग्नेंट हैं. वहीं, गाने में आखिरी सुधार उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में किए. अब जब उनका बच्चा भी दुनिया में आ चुका है और गाना भी रिलीज हो गया है, तो आनंदी इस पूरे सफर को किसी आशीर्वाद से कम नहीं मानतीं.

आज भी मेरे रोंगटे खड़े कर देता है

अपने इस सफर के बारे में आनंदी ने बताया, “पिछले साल नवंबर में मैं रहमान सर के स्टूडियो में किसी और चीज की रिकॉर्डिंग के लिए गई थी. उसे रिकॉर्ड करने के बाद मुझे यह धुन गाकर देखने के लिए कहा गया. उस वक्त मुझे गाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, क्योंकि गाना अभी बन ही रहा था और इसका प्रोडक्शन भी बाकी था. करीब छह महीने बाद जब मुझे पता चला कि मेरी आवाज में यह गाना फाइनल हो गया है, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. सबसे खास बात यह है कि आज जो गाना आप सुन रहे हैं, उसमें करीब 80-90 प्रतिशत हिस्सा उसी पहले वर्जन का है, जिसे मैंने नवंबर में रिकॉर्ड किया था. रहमान सर की कंपोजिशन और जावेद अख्तर जी के लिखे गाने का हिस्सा बनना आज भी मेरे रोंगटे खड़े कर देता है. यह गाना मेरे लिए बेहद खास है और मैं इसका हिस्सा बनकर खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं.”

रहमान सर को अपना गुरु मानती हूं

आनंदी ने आगे कहा, “मैं रहमान सर को अपना गुरु मानती हूं. उनके संगीत ने मुझे जिंदगी को समझने में बहुत मदद की है और उनके साथ बिताया हर पल मेरे लिए सीखने जैसा होता है. जब मुझे यह गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिला, उसी वक्त मुझे पता चला था कि मैं प्रेग्नेंट हूं. मेरी प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में मुझे पता चला कि यह गाना मेरी आवाज में आ रहा है. बाद में जब मैं नौवें महीने में थी, तब लिरिक्स में बदलाव की वजह से गाने की दो लाइनें दोबारा रिकॉर्ड करनी थीं. मैं चाहती थी कि इसे जल्द से जल्द कर लूं, क्योंकि मुझे डर था कि अगर मुझे लेबर पेन शुरू हो गया तो मैं ये सुधार नहीं कर पाऊंगी. जब मैंने यह बात बताई, तो सार्थक और रहमान सर दोनों ने बहुत प्यार से बात की और अगले ही दिन मुझे उन लाइनों को रिकॉर्ड करने का मौका मिल गया. रिकॉर्डिंग के बाद मेरी रहमान सर से बात भी हुई, जो मेरे लिए बेहद खास पल था. अब मेरा बच्चा भी आ चुका है और गाना भी रिलीज हो गया है. इसलिए मुझे लगता है कि इस गाने का सफर मेरी प्रेग्नेंसी के सफर के साथ-साथ चला. यह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है.”

आनंदी जोशी एक बहुभाषी प्लेबैक सिंगर

आनंदी जोशी एक बहुभाषी प्लेबैक सिंगर हैं, जिन्होंने कई चर्चित बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में अपनी आवाज दी है. इनमें ‘मलाल’, ‘गांधी टॉक्स’ और अब ‘बटवारा 1947′ शामिल हैं. उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘मलाल’ के गाने ‘जरा सुनो’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इसके बाद उन्होंने एआर रहमान की ‘गांधी टॉक्स’ के गाने ‘जरा जरा मन खुलावते’ में अपनी आवाज दी और अब ‘बटवारा 1947′ के ‘देखिए जहां जाइए कहीं’ के साथ उनके सफर में एक और खास अध्याय जुड़ गया है. आनंदी को महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर अवॉर्ड मराठी और मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं. वह अब तक मराठी, हिंदी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ समेत कई भाषाओं में 350 से ज्यादा गाने गा चुकी हैं. मराठी संगीत में भी उन्होंने ‘किती सांगायचंय मला’, ‘धागा धागा’, ‘मन केसर केसर’ और ‘आनंदघना’ जैसे कई यादगार गाने दिए हैं.




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