
Janmashtami 2026 Puja Muhurat: जन्माष्टमी पर कान्हा की पूजा हर शहर में रात 12 बजे शुरू नहीं होगी. दिल्ली में निशीथ पूजा रात 11:57 बजे शुरू होगी, जबकि मुंबई में मुहूर्त रात 12:14 बजे लगेगा. जानिए आपके शहर में लड्डू गोपाल का अभिषेक और जन्म आरती किस समय करें.
जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल के अभिषेक, शृंगार और भोग की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. अधिकांश भक्त रात 12 बजे कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं. लेकिन इस बार अलग-अलग शहरों के पूजा मुहूर्त को लेकर उलझन दिखाई दे रही है.
दिल्ली में निशीथ पूजा रात 11:57 बजे शुरू होगी. मुंबई में यही मुहूर्त रात 12:14 बजे लगेगा. कोलकाता में पूजा का शुभ समय रात 11:13 बजे से ही शुरू हो जाएगा.
ऐसे में सवाल है कि कान्हा की जन्म आरती घड़ी देखकर रात 12 बजे करें या अपने शहर के निशीथ काल के अनुसार?
जन्माष्टमी 4 सितंबर को
पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को तड़के 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी. अष्टमी तिथि 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी.
जन्माष्टमी की मुख्य पूजा निशीथ काल में करने की परंपरा है. वैदिक समय गणना में निशीथ काल स्थानीय मध्यरात्रि के आसपास का समय होता है. यह सूर्योदय, सूर्यास्त और शहर की भौगोलिक स्थिति के आधार पर निकाला जाता है. इसी कारण हर शहर का पूजा मुहूर्त अलग होता है.
जन्माष्टमी 2026: प्रमुख शहरों का पूजा मुहूर्त
नीचे दिया गया समय संबंधित शहर के स्थानीय समय के अनुसार है. जिन शहरों में मुहूर्त आधी रात के बाद समाप्त होगा, वहां समाप्ति की तारीख 5 सितंबर होगी.
| शहर | निशीथ पूजा का समय |
| दिल्ली | रात 11:57 से 12:43 बजे तक |
| नोएडा | रात 11:57 से 12:42 बजे तक |
| गुरुग्राम | रात 11:58 से 12:44 बजे तक |
| मुंबई | रात 12:14 से 1:01 बजे तक |
| कोलकाता | रात 11:13 से 11:59 बजे तक |
| चेन्नई | रात 11:45 से 12:31 बजे तक |
| बेंगलुरु | रात 11:55 से 12:42 बजे तक |
| हैदराबाद | रात 11:52 से 12:38 बजे तक |
| पुणे | रात 12:10 से 12:57 बजे तक |
| जयपुर | रात 12:03 से 12:49 बजे तक |
| अहमदाबाद | रात 12:16 से 1:02 बजे तक |
| चंडीगढ़ | रात 11:59 से 12:45 बजे तक |
शहरवार निशीथ काल की यह गणना पंचांग बताए गए स्थानीय समय के अनुसार है.
दिल्ली-एनसीआर में आरती कब करें?
दिल्ली में निशीथ पूजा का मुहूर्त रात 11:57 से 12:43 बजे तक है. नोएडा में यह रात 11:57 से 12:42 बजे और गुरुग्राम में 11:58 से 12:44 बजे तक रहेगा.
दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले भक्त रात 11:57 बजे पूजा शुरू कर सकते हैं. रात 12 बजे कान्हा का जन्मोत्सव और आरती की जा सकती है. इसके बाद झूला झुलाएं, माखन-मिश्री का भोग लगाएं और भक्तों में प्रसाद बांटें.
पूजा की सामग्री, पंचामृत, वस्त्र, शृंगार और भोग पहले से तैयार रखें, ताकि मुख्य पूजा निशीथ काल में पूरी हो सके.
मुंबई और अहमदाबाद में रात 12 बजे शुरू नहीं होगा मुहूर्त
मुंबई में निशीथ पूजा रात 12:14 बजे से 1:01 बजे तक होगी. पुणे में पूजा का समय रात 12:10 से 12:57 बजे तक रहेगा. अहमदाबाद में मुहूर्त रात 12:16 से 1:02 बजे तक है.
इन शहरों में शास्त्रीय निशीथ विधि से पूजा करने वाले भक्त स्थानीय मुहूर्त शुरू होने पर कान्हा का पूजन करें. निशीथ विधि से पूजा करने वाले भक्त स्थानीय मुहूर्त शुरू होने पर कान्हा का पूजन करें. घर या मंदिर की परंपरा रात 12 बजे जन्म आरती करने की है तो उसका पालन किया जा सकता है.
कोलकाता में रात 12 बजे से पहले पूरी होगी पूजा
कोलकाता में निशीथ पूजा का समय रात 11:13 से 11:59 बजे तक है. यहां स्थानीय निशीथ काल घड़ी के 12 बजने से पहले समाप्त हो जाएगा.
इसलिए कोलकाता में रहने वाले भक्त रात 11:13 बजे के बाद मुख्य पूजा शुरू कर सकते हैं. लड्डू गोपाल का अभिषेक, शृंगार, भोग और आरती रात 11:59 बजे तक पूरी की जा सकती है.
सिर्फ रात 12 बजे का इंतजार करने पर निशीथ पूजा का निर्धारित समय निकल जाएगा.
पहले अभिषेक करें या आरती?
लड्डू गोपाल का अभिषेक, वस्त्र और शृंगार करने में समय लगता है. इसलिए पूजा मुहूर्त शुरू होने से पहले सारी सामग्री एक स्थान पर रख लें.
सबसे आसान तरीका यह रहेगा-
- मुहूर्त शुरू होते ही पूजा का संकल्प लें.
- लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें.
- कान्हा को स्वच्छ वस्त्र और आभूषण पहनाएं.
- स्थानीय मध्यरात्रि के समय जन्म आरती करें.
- माखन-मिश्री, पंजीरी और तुलसी दल का भोग लगाएं.
- इसके बाद कान्हा को झूला झुलाएं और प्रसाद बांटें.
अष्टमी रात 12:13 बजे खत्म होगी, फिर क्या करें?
पूरे भारत में अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे समाप्त होगी, लेकिन अलग-अलग शहरों का निशीथ काल इससे पहले या बाद में हो सकता है. इसी कारण मुंबई और अहमदाबाद का निशीथ मुहूर्त अष्टमी समाप्त होने के बाद तक रहेगा.
जन्माष्टमी का दिन और पूजा समय तय करते हुए केवल घड़ी का 12 बजना नहीं देखा जाता. इसमें अष्टमी तिथि, निशीथ काल, परंपरा और संप्रदाय के नियम भी शामिल होते हैं.
अगर आपके परिवार में रात 12 बजे जन्म आरती की परंपरा है तो उसी का पालन करें. शास्त्रीय निशीथ पूजा करने वाले भक्त अपने शहर का स्थानीय मुहूर्त देखें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.