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कहानी 20 साल के बिट्टू तबाही की… जिसने अकेले साफ कर दी अजनार नदी, जहां कभी जलीय जीवन हो गया था खत्म | bittu tabahi ajnar river cleanup anand mahindra viral Success story river pollution rajgarh biaora 


कभी-कभी एक व्यक्ति का संकल्प उन कामों को संभव बना देता है, जिनके बारे में लोग सिर्फ बातें करते हैं. राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले 20 वर्षीय बिट्टू तबाही की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जिस अजनार नदी को लोग धीरे-धीरे एक नाले में बदलते देख रहे थे, उसे बचाने का जिम्मा इस युवा ने अकेले अपने कंधों पर उठा लिया. नदी में गंदगी इतनी बढ़ चुकी थी कि जलीय जीवों का अस्तित्व लगभग खत्म हो गया था और पानी भी प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहा था. ऐसे हालात में बिट्टू ने हार मानने के बजाय नदी को फिर से जीवंत बनाने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए दिन-रात जुट गए. उनकी मेहनत ने न सिर्फ नदी की तस्वीर बदली, बल्कि पूरे देश का ध्यान भी अपनी ओर खींचा.

नाले में बदलती जा रही थी अजनार नदी

राजगढ़ जिले के आंदलहेड़ा गांव से निकलने वाली अजनार नदी कभी इलाके की जीवनरेखा मानी जाती है. इसका साफ पानी लोगों की जरूरतें पूरी करता था और नदी के भीतर जलीय जीवन भी फलता-फूलता था. लेकिन समय के साथ बढ़ती गंदगी, प्लास्टिक कचरे और लापरवाही ने इसकी हालत खराब कर दी. स्थिति ऐसी हो गई कि नदी में दूर-दूर तक सिर्फ कचरा और गंदगी नजर आने लगी. प्रदूषण के कारण नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया और जलीय जीव भी लगभग समाप्त हो गए.  

कभी पीने के काम आता था नदी का पानी

अजनार नदी बचाओ अभियान से जुड़े लोग बताते हैं कि एक समय था जब लोग इस नदी के पानी का उपयोग पीने के लिए भी करते थे. उन्होंने नदी संरक्षण के लिए करीब 90 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा भी की. उनके अनुसार, अजनार नदी इस क्षेत्र की पहचान रही है, लेकिन लोगों की लापरवाही के कारण आज इसकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. उनका मानना है कि नदी की इस दुर्दशा के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी समाज की ही है, जिसने समय रहते इसे बचाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए.

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26 जनवरी को बिट्टू ने नदी का सफाई अभियान शुरू किया था.  

अकेले शुरू किया सफाई अभियान

जब अधिकांश लोग नदी की बिगड़ती हालत पर सिर्फ चिंता जता रहे थे, तब बिट्टू तबाही ने कुछ अलग करने का फैसला लिया. उन्होंने 26 जनवरी 2026 से अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया. शुरुआत में कुछ दोस्त उनके साथ जुड़े, लेकिन धीरे-धीरे सभी पीछे हट गए. इसके बाद बिट्टू अकेले ही इस अभियान को आगे बढ़ाने लगे. उन्होंने बिना किसी बड़े संसाधन के रोज घंटों नदी में उतरकर प्लास्टिक, जलकुंभी और अन्य कचरे को निकालना शुरू किया.

तीन महीने की मेहनत से बदल गई पहचान

लगातार तीन महीने तक चले इस अभियान का असर साफ दिखाई देने लगा. जिस नदी का पानी गंदगी से भर गया था, वहां धीरे-धीरे साफ पानी नजर आने लगा. नदी के किनारे और जलधारा पहले की तुलना में काफी स्वच्छ दिखाई देने लगे. बिट्टू अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सफाई अभियान की तस्वीरें और वीडियो भी साझा करते रहे. नदी की पहले और बाद की तस्वीरों ने लोगों को हैरान कर दिया. उनकी मेहनत की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी और लोग उन्हें पर्यावरण संरक्षण का युवा चेहरा बताने लगे.

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बिट्टू खूद के पैसों से खर्च करके जेसीबी लाकर भी नदी की सफाई करवाता है.  

जब आनंद महिंद्रा ने की सराहना

बिट्टू की मेहनत का असर सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा. उनकी कहानी देशभर में पहुंची और उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी पहल की प्रशंसा की. महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर कहा था कि यदि सोशल मीडिया लोगों को अच्छे काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है तो यह सकारात्मक बात है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो समाज और पर्यावरण के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं.

कौन हैं बिट्टू तबाही?

बिट्टू तबाही का असली नाम बिट्टू सिंह रघुवंशी है. वे राजगढ़ जिले के ब्यावरा के निवासी हैं और सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान रखते हैं. बिट्टू बताते हैं कि नदी की हालत उन्हें अंदर तक परेशान करती थी. यही वजह थी कि उन्होंने सफाई अभियान की शुरुआत की. वे सुबह जल्दी घर से निकल जाते और घंटों तक नदी के बीच खड़े होकर सफाई करते रहते. उनके मुताबिक कई बार उन्हें रात में भी यही चिंता रहती थी कि अगले दिन नदी के कितने हिस्से को और साफ करना है.







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