खबर

नए कानूनों के बाद भी क्यों बेखौफ है ‘पेपर लीक सिंडिकेट’? बन चुका है संगठित आपराधिक उद्योग | Maharashtra TET paper leak paper leak syndicate paper leak law Teacher Eligibility Test


नई दिल्ली:

28 जून को होने वाली महाराष्ट्र TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) का पेपर लीक होना और उसके तुरंत बाद परीक्षा का टाला जाना, कड़े कानूनों और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों पर तीखे सवाल खड़े कर रहा है. हालिया NEET (UG) पेपर लीक मामले की जांच से ये स्पष्ट हुआ है कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया और उसके साथियों ने एक बेहद संगठित और फूलप्रूफ नेटवर्क तैयार किया था, जो कई स्तरों पर काम करता है.

  • खुफिया जानकारी और रेकी: सिंडिकेट के सदस्य गोपनीय परीक्षा सामग्री से जुड़े प्रिंटिंग प्रेस, लॉजिस्टिक्स/ट्रांसपोर्ट गाड़ियों और उन गुप्त गोदामों की पूरी जानकारी जुटाते हैं, जहां प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखा जाता है.
  • सीलों से छेड़छाड़: परीक्षा केंद्रों तक ले जाए जा रहे सीलबंद बक्सों से बड़ी चालाकी से छेड़छाड़ की जाती है और छात्रों तक वास्तविक बॉक्स पहुंचने से पहले ही प्रश्न पत्र चुरा लिए जाते हैं.
  • डिजिटल और सोशल मीडिया प्रसार: एक बार पेपर हाथ आने के बाद, एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया चैनलों (जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप) के माध्यम से इसे कुछ ही मिनटों में हजारों चुनिंदा प्रतिभागियों तक फैला दिया जाता है.
Latest and Breaking News on NDTV

पैसे और शोहरत का शॉर्टकट: ‘कोचिंग संस्थानों और माफिया का नेक्सस’

पेपर लीक को एक बेहद आकर्षक, संगठित आपराधिक उद्योग में बदल दिया गया है, जहां कोचिंग संस्थान और बिचौलिए मिलकर काम करते हैं.

इसके पीछे कई कारण हैं-

  1. ज़बरदस्त मुनाफ़ा- जांच से पता चला है कि लीक हुए पेपर बहुत बड़ी रकम में बेचे जाते हैं. अक्सर प्रति छात्र 30 से 32 लाख रुपये तक वसूले जाते हैं. इससे एक ‘मुनाफ़े का पिरामिड’ तैयार होता है, जिसमें बिचौलिए, परीक्षा केंद्र के कर्मचारी और कोचिंग चलाने वाले रातों-रात करोड़ों कमाते हैं.
  2. पक्के नतीजे और व्यावसायिक इज़्ज़त- परीक्षा से पहले ही पेपर मुहैया कराकर कोचिंग सेंटर अपने छात्रों के लिए शीर्ष रैंक या अच्छे नंबरों की गारंटी देते हैं. जितने अधिक छात्र सफल होते हैं, कोचिंग संस्थान की उतनी ही बड़ी ब्रांडिंग और मार्केटिंग होती है, जिससे आने वाले वर्षों में और अधिक दाखिले और भारी-भरकम फीस वसूलने का रास्ता साफ होता है.
  3. परीक्षा केंद्रों और अंदरूनी सूत्रों के साथ मिलीभगत- जांच के अनुसार, इस खेल में कोचिंग मालिकों, प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों और परीक्षा केंद्रों के प्रशासनिक कर्मचारियों का एक मजबूत नेटवर्क शामिल होता है, जो लीक सामग्री से होने वाले अवैध मुनाफ़े को आपस में बराबर बांटते हैं.
  4. सफल होने का मानसिक दबाव- भारतीय परीक्षा प्रणाली में गलाकाट प्रतिस्पर्धा है. मेडिकल, इंजीनियरिंग या सरकारी नौकरियों में भविष्य सुरक्षित करने का दबाव इतना अधिक होता है कि छात्र और उनके माता-पिता भी अनैतिक साधनों के बहकावे में आकर जीवन भर की पूंजी दांव पर लगा देते हैं.
  5. ‘गेस पेपर’ का मायाजाल- कई बार पकड़े जाने के डर से सीधे असली पेपर लीक करने के बजाय, संस्थान ‘गेस पेपर’ के नाम पर सामग्री बेचते हैं, जो अंदरूनी सूत्रों की मदद से तैयार किए जाते हैं और असली परीक्षा के प्रश्नपत्र से काफी मिलते-जुलते होते हैं.
Latest and Breaking News on NDTV

कानून का अभाव और प्रशासनिक जवाबदेही का संकट

फरवरी 2024 में संसद ने UPSC, SSC, NEET, JEE और CUET जैसी प्रमुख परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024′ पारित किया था. इसमें अपराधियों को 5 से 10 साल की कैद और न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन, यह कड़ा कानून भी ज़मीनी स्तर पर बेअसर साबित हो रहा है.

  • आर्थिक गणित के आगे जुर्माना बौना: चूंकि माफिया एक-एक छात्र से 30-32 लाख रुपये वसूलता है, इसलिए 1 करोड़ रुपये के जुर्माने की रकम सिर्फ 3 छात्रों से हुई कमाई से ही पूरी हो जाती है. भारी मुनाफे के सामने यह जुर्माना उनके लिए कोई बड़ा आर्थिक डर पैदा नहीं करता.
  • निचले स्तर पर ही गिरफ़्तारी (बलि का बकरा): अक्सर जांच एजेंसियां छोटे एजेंटों, कंप्यूटर ऑपरेटरों या परीक्षार्थियों को ही पकड़ पाती हैं. इस पूरे सिंडिकेट के असली सरगना (Kingpins) और परीक्षा बोर्डों के शीर्ष अधिकारी कानूनी पहुंच से दूर सुरक्षित बचे रहते हैं.
  • शून्य जवाबदेही: शामिल सिंडिकेट को पता है कि कोई भी उन्हें कानूनी तौर पर लूटी गई रकम वापस करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, जिससे वे पैसे कमाने के माध्यम के रूप में निर्भीक होकर इस काम को बार-बार अंजाम देते हैं.

‘पेपर लीक’ जैसी प्रशासनिक विफलताएं देश के करोड़ों होनहार युवाओं के भरोसे को चकनाचूर कर रही हैं. जब तक परीक्षा प्रणालियों में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी और अपराधियों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होगी जो नज़ीर बने, तब तक नए कानून महज़ कागज़ी साबित होते रहेंगे.

इसे भी पढ़ें: TET पेपर लीक मामले में सीएम फडणवीस ने गठित की SIT, ज्वाइंट सीपी की अध्यक्षता में होगी जांच

इसे भी पढ़ें: TET पेपर लीक का भंडाफोड़: भिवंडी से ₹1.5 करोड़ में बेचने लाया प्रश्नपत्र बरामद, 3 आरोपी गिरफ्तार




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button