

नई दिल्ली:
दिल्ली के 48 गांवों को शहर में बदलने का फैसला दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने किया है. इन्हें शहरी गांव घोषित कर दिया गया है. दिल्ली में अभी तक 309 गांवों का शहरीकरण हो चुका है. लेकिन अभी भी 48 गांव इस दायरे से बाहर थे. दिल्ली मास्टर प्लान 2041 के तहत एमसीडी ने इसे मंजूरी दी है. इन गांवों को शहरी बनाने के बाद मास्टर प्लान दिल्ली 2041 (MPD-2041) यहां भी लागू कर विकास कार्य कराए जाएंगे. इसमें नरेला, नजफगढ़, रोहिणी, रिठाला, महरौली, छतरपुर तक के गांवों को शामिल किया गया है.
दिल्ली के कौन से 48 गांव बनेंगे शहर
दिल्ली मास्टर प्लान 2041 के जिन 48 गांवों को जिलों के हिसाब से राजस्व विभाग ने शहर में तब्दील किया है. उनमें पल्ला, सिंगोला, मुंगेशपुर, ढांसा, बकोली, हमीदपुर, निजामपुर, फतेहपुर बेरी, कंगनहेड़ी, रावता, ताजपुर कलां, दौलतपुर, चंदनहोला, बडूसराय, घुमनहेड़ा, शिकारपुर, राजपुर कलां, तटेसर, जगतपुर, बदरपुर खादर, बाकरगढ़, गालिबपुर, ईसापुर, खैर, मुंडेला कलां, सुरखपुर, मुंडेला खुर्द, झुलझुली शामिल हैं.
डीडीए की लैंड पूलिंग पॉलिसी
लैंड पूलिंग नीति लागू होने से इन क्षेत्रों में आवासीय योजना के तहत फ्लैट, कमर्शियल शॉप और हाईटेक कांप्लेकेस बनाने का रास्ता साफ होगा. पक्की सड़कें, नए सीवर और ड्रेनेज सिस्टम, जल निकासी के साथ स्ट्रीट लाइट और पार्क बनेंगे. रोहिणी, नरेला और नार्थवेस्ट दिल्ली के इन गांवों की कनेक्टिविटी रिठाला से कुंडली तक मेट्रो रेड लाइन एक्सटेंशन से हो पाएगी. एलजी की अध्यक्षता में डीडीए ने वित्त वर्ष के लिए 14962 करोड़ के बड़े बजट को मंजूरी दी है. इसका एक हिस्सा नरेला में मल्टी स्पोर्ट्स इंटीग्रेटेड स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर बनाने पर खर्च होगा. नरेला मेट्रो डिपो के साथ दिल्ली में अटल कैंटीन बनाने के लिए खाली जमीन की नीति पर भी मुहर लगाई गई.
नरेला-बवाना इलाकों के कुछ गांव
दिल्ली के उत्तर और उत्तर पश्चिम जिले के पल्ला, सिंगोला, मुंगेशपुर, निजामपुर, बकोली, हमीदपुर, ताजपुर कलां, तटेसर, राजपुर कलां, जगतपुर, बदरपुर खादर जैसे गांवों को फायदा मिलेगा.ये गांव नरेला, अलीपुर और कंझावला, बवाना इलाकों में आते हैं. इनमें से कुछ दिल्ली को पंजाब-हरियाणा से जोड़ने वाले जीटी करनाल रोड के पास हैं. कुछ दिल्ली और हरियाणा सीमा पर सिंघु बॉर्डर पर हैं. नरेला सब सिटी और औद्योगिक क्षेत्र भी डीडीए का बड़ा आवासीय और इंडस्ट्रियल हब है. दिल्ली मेट्रो रेड लाइन की रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर का फायदा इन गांवों को मिलेगा. यमुना नदी का खादर क्षेत्र और पल्ला वाटर वर्क्स को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति हो सकेगी.
नजफगढ़-मटियाला को भी फायदा
दक्षिण-पश्चिम जिला के गांव नजफगढ़, मटियाला, छावला और कापसहेड़ा सब डिवीजन में आते हैं. यह इलाका हरियाणा के बहादुरगढ़ और गुरुग्राम से सटा है. इसके कंगनहेड़ी, रावता, ढांसा, दौलतपुर, बडूसराय, ईसापुर, खैर, मुंडेला कलां, मुंडेला खुर्द, घुमनहेड़ा, शिकारपुर, बाकरगढ़, गालिबपुर, झुलझुली, सुरखपुर गांवों को फायदा मिलेगा. अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) इन गांवों को सीधे द्वारका, आईजीआई एयरपोर्ट और एनएच-44 से जोड़ता है. दिल्ली मेट्रो की ग्रे लाइन का आखिरी स्टेशन ढांसा बस स्टैंड और मेट्रो स्टेशन से ये जुड़ता है.
द्वारका सिटी और यशोभूमि जो एशिया का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर भी इन गांवों से कुछ दूरी पर है. नजफगढ़ झील दिल्ली और गुरुग्राम के बीच अहम जलस्रोत है. छावला का बीएसएफ कैंप और राव तुलाराम मेमोरियल कॉम्प्लेक्स भी यहां है.
महरौली-छतरपुर को भी फायदा
साउथ दिल्ली के महरौली और छतरपुर, भाटी माइंस सब डिवीजन के किनारे अरावली की पहाड़ी से सटा है. फतेहपुर बेरी, चंदनहोला गांव शामिल है. असोला भाटी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और अरावली ग्रीन बफर जोन भी यहां है. छतरपुर मंदिर, साउथ दिल्ली को सीधे ग्वाल पहाड़ी और गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन से जोड़ने वाला ये रूट है. इन गांवों के आसपास महंगे फार्महाउस, रिसॉर्ट और इवेंट जोन हैं.
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