मध्य प्रदेश

दतिया उपचुनाव: 71.44 फीसदी लोगों ने दिया वोट, अब नतीजों का इंतजार


दतिया विधानसभा उप निर्वाचन 2026 के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित वातावरण में मतदान संपन्न हो गया. लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं और युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांग मतदाताओं ने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया.

निर्वाचन विभाग के अनुसार दतिया विधानसभा क्षेत्र में लगभग 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09, महिला मतदाताओं का 68.48 तथा अन्य मतदाताओं का 20 प्रतिशत रहा. कुल 2,20,410 मतदाताओं में से 1,57,473 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.

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प्रशासन की रही कड़ी निगरानी

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के मार्गदर्शन में निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप मतदान की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं. सभी 291 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, पेयजल, छाया, चिकित्सा सुविधा और दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर सहित आवश्यक इंतजाम किए गए थे.

मतदान के दौरान प्रशासन और पुलिस की लगातार निगरानी बनी रही. विभिन्न मतदान केंद्रों का अधिकारियों ने निरीक्षण किया और पूरे जिले में कहीं से भी किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली.

ईवीएम सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में जमा

मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम और अन्य निर्वाचन सामग्री लेकर प्राप्ति केंद्र पहुंचे. इसके बाद ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तथा सीसीटीवी निगरानी वाले स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा गया. अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं.

जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लेने वाले सभी मतदाताओं, निर्वाचन ड्यूटी में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस बल, केंद्रीय सुरक्षा बल, मीडिया प्रतिनिधियों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया.

चुनावी विश्लेषण: त्रिकोणीय मुकाबला आखिर कैसे बना सीधी टक्कर?

वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव का मानना है कि मतदान से पहले जिस चुनाव को त्रिकोणीय माना जा रहा था, वह मतदान तक आते-आते बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई में बदल गया. उनके अनुसार चुनाव के अंतिम चरण में मतदाता पूरी तरह शांत रहे और अपनी पसंद सार्वजनिक करने के बजाय सीधे मतदान केंद्रों तक पहुंचे. उनका कहना है कि बारिश के बावजूद मतदान प्रतिशत संतोषजनक रहा और दोनों प्रमुख दलों में अंदरूनी असंतोष एवं भितरघात भी देखने को मिला.

न्यूज़18 के दतिया ब्यूरो प्रमुख राजीव मिश्रा के अनुसार मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. निर्वाचन विभाग की तैयारियां प्रभावी रहीं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रही. अब पूरा राजनीतिक माहौल 3 अगस्त को आने वाले जनादेश पर केंद्रित हो गया है.

वरिष्ठ पत्रकार हरीश तिवारी का कहना है कि मतदान के साथ चुनावी शोर तो थम गया, लेकिन दतिया में अब जीत-हार के कयासों का दौर शुरू हो गया है. उनके मुताबिक इस उपचुनाव में बीजेपी के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम रहा.

बीजेपी ने जहां मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ व्यापक प्रचार किया, वहीं कांग्रेस ने भी दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारा. उनका मानना है कि इस चुनाव के परिणाम का असर नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ेगा.

आजतक के दतिया संवाददाता अशोक शर्मा के अनुसार इस उपचुनाव की शुरुआत से लेकर मतदान तक घटनाक्रम लगातार बदलते रहे. पहले उपचुनाव होने को लेकर असमंजस रहा, फिर प्रत्याशियों के चयन ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए. बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने कुंवर घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा.

शुरुआत में आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव के कारण मुकाबला त्रिकोणीय माना गया, लेकिन मतदान तक आते-आते चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर में बदल गया. उनका मानना है कि आशुतोष तिवारी का क्षेत्र में नया होना बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है, जबकि घनश्याम सिंह की सादगी कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना सकती है.

अमृत दर्शन के संपादक जगत शर्मा का कहना है कि यह उपचुनाव कई अप्रत्याशित घटनाओं के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा. बीजेपी द्वारा डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना, उनके समर्थकों द्वारा हाईवे जाम करना, नामांकन के दौरान उनका भावुक होना और इसके बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का दतिया में लगातार डेरा डालना चुनाव के प्रमुख घटनाक्रम रहे. वहीं कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह भी अपेक्षा से बेहतर स्थिति में चुनाव लड़ते दिखाई दिए. उनका मानना है कि आजाद समाज पार्टी का प्रभाव इस बार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया.

अब 3 अगस्त पर टिकी हैं निगाहें

दतिया विधानसभा उपचुनाव का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है. अब सभी राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और मतदाताओं की निगाहें 3 अगस्त 2026 को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं. इसी दिन तय होगा कि दतिया विधानसभा की जनता ने अपना जनादेश किस प्रत्याशी के पक्ष में दिया है और उपचुनाव के दौरान बने तमाम राजनीतिक समीकरण किस हद तक सही साबित हुए.

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