
दतिया उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है, जहां उनका मुकाबला बीजेपी के आशुतोष तिवारी से होगा. टिकट मिलने के बाद घनश्याम सिंह के घर के बाहर समर्थकों का जमावड़ा लग चुका है. उनके समर्थक ढोल नगाड़े बजा रहे हैं.
घनश्याम सिंह दतिया राजघराने से जुड़े प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं. जिले की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है. उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जूदेव वर्ष 1984 में भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद रहे थे. 72 वर्षीय घनश्याम सिंह ने दतिया से दो बार और सेवढ़ा से एक बार विधायक रह चुके हैं.
तीन दशक का राजनीतिक अनुभव
घनश्याम सिंह ने वर्ष 1993 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दतिया विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा के शंभु तिवारी को हराया था. हालांकि 1998 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया और चंदन सिंह को उम्मीदवार बनाया, लेकिन पार्टी चुनाव हार गई. इसके बाद 2003 में कांग्रेस ने फिर उन पर भरोसा जताया. उन्होंने राजेंद्र भारती को हराकर दोबारा विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की. लेकिन 2008 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हाथों हार का सामना करना पड़ा.
सेवढ़ा से भी रहा राजनीतिक सफर
दतिया के बाद कांग्रेस ने 2013 में घनश्याम सिंह को सेवढ़ा विधानसभा से मैदान में उतारा, जहां वे बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल से करीब 1,800 मतों से पराजित हुए. 2018 में उन्होंने वापसी करते हुए बीजेपी के राधेलाल बघेल को हराकर जीत दर्ज की और विधायक बने. हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सेवढ़ा से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप अग्रवाल ने उन्हें शिकस्त दी.
उपचुनाव में दिलचस्प मुकाबले के आसार
दतिया उपचुनाव के लिए बीजेपी पहले ही आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है. ऐसे में कांग्रेस नेता घनश्याम सिंह के नाम पर मुहर लगाने के बाद अनुभव बनाम युवा नेतृत्व की दिलचस्प राजनीतिक लड़ाई देखने को मिलेगी. दोनों दलों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं और आगामी दिनों में प्रचार अभियान भी गति पकड़ने की संभावना है.
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