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डॉक्टर से मारपीट का मामला : थप्पड़ मारे, कॉलर पकड़ा… आखिर हो रही हैं ऐसी घटनाएं, Doctors के साथ कैसे कम्युनिकेशन करें बेहतर



Patient Doctor Communication : डॉक्टर्स को अक्सर धरती का भगवान कहा जाता है, क्योंकि वे कई बार नामुमकिन को मुमकिन करते हुए गंभीर स्थितियों में मरीजों की जान बचाने का काम करते हैं. ऐसे में जब किसी डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना सामने आती है, तो ये हर किसी को हैरान कर देती है. महाराष्ट्र से ऐसा ही एक मामला सामने आया है. मुंबई से सटे कल्याण पूर्व स्थित भानु ज्योत हॉस्पिटल में एक डॉक्टर के साथ मारपीट की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

बताया जा रहा है कि मरीज के इलाज को लेकर हुई बातचीत के दौरान एक व्यक्ति ने डॉक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी. इस घटना के बाद हॉस्पिटल में तनाव का माहौल बन गया और स्वास्थ्यकर्मियों में भी नाराजगी देखने को मिली.

क्या सवाल खड़ा करती है इस तरह की घटनाएं?

ये घटना एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर मरीज या उनके परिजन डॉक्टर्स के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं? क्या इलाज से जुड़ी किसी भी नाराजगी का जवाब हिंसा हो सकता है? 

क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच बेहतर कम्युनिकेशन की कमी, इलाज को लेकर गलतफहमियां और बढ़ती अधीरता ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बन रही हैं. हालांकि, किसी भी परिस्थिति में हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता. डॉक्टर्स की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.

डॉक्टर के साथ कैसे कम्युनिकेशन करें बेहतर?

इस तरह की घटनाएं को रोकने के लिए डॉक्टर्स के साथ कम्युनिकेशन को बेहतर करना बहुत ही जरूरी है. इसके लिए मरीजों को अपनी परेशानियों को साफ-साफ बोलने की जरूरत होती है. कोशिश करें कि अपनी समस्याएं, पुरानी दवाएं और डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवाल सभी को अच्छे से याद रखें.

कभी भी डॉक्टर्स से अपनी परेशानी को न छुपाएं, कई बार डॉक्टर्स को सारी समस्याएं पता नहीं होती है, जिसकी वजह से इलाज अच्छे से नहीं हो पाता है. बाद में जब परेशानी ठीक नहीं होती है, तो मरीज और डॉक्टर्स के बीच विवाद शुरू हो जाता है. ऐसे में कोशिश करें कि अपनी सारी परेशानी डॉक्टर को बताएं, ताकि बेहतर इलाज हो सके और आगे दिक्कत न हो.

ताकि जब डॉक्टर देखे, तो उनकी ओर से पूछे गए प्रश्नों का आप सही तरीके से जवादब दे सकें और फालतू के विवाद न हों. कई बार सही ढंग से सवाल न करने पर या फिर दवाओं की डोज सही से न समझने के कारण मरीजों और डॉक्टर्स में विवाद शुरू हो जाता है. इसलिए जब डॉक्टर के पास जाएं, तो सारे प्रश्न कर लें. ताकि आगे किसी तरह की दिक्कत न हो.
 




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