
करूर:
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शुक्रवार को करूर भगदड़ में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र सौंपे. उन्होंने इस त्रासदी को एक ‘अमिट घाव’ बताया, जो उनके दिल पर आज भी भारी बोझ बना हुआ है. इस दौरान सीएम विजय काफी भावुक हो गए. वो लगभग 9 महीने बाद उस भगदड़ वाली जगह पर पहुंचे थे.
सभा को संबोधित करते हुए भावुक विजय ने कहा कि करूर त्रासदी का दर्द आज भी उनके दिल में मौजूद है. उन्होंने कहा, “करूर के मेरे सभी भाइयों और बहनों को मेरा नमन, जो मेरे दिल में बसे हुए हैं. जीवन में कोई व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई हासिल कर ले, लेकिन दिल के घाव और दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता. कई मुश्किलों और भावनात्मक पीड़ाओं से गुजरने के बाद मैं आज आपके सामने खड़ा हूं.”

सभा को संबोधित करते सीएम विजय.
सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में काफी कमी आई है- CM विजय
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया कि जब “पार्टी फंड” का मुद्दा उठाया गया तो विपक्षी सदस्य विधानसभा से बाहर चले गए. उन्होंने दावा किया कि पहले सरकारी विभागों में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार होता था, हालांकि उन्होंने कहा कि अब लोगों का मानना है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में काफी कमी आई है.
मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई (अरिग्नार अन्ना) की जयंती पर नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी देने की योजना को वादे के अनुसार लागू किया जाएगा.

32 परिवारों के एक सदस्य को सौंपे गए नियुक्ति पत्र
सरकार के पुनर्वास प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय करूर पहुंचे थे. एटलस एरिना में आयोजित एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित 32 परिवारों के एक सदस्य को नियुक्ति पत्र सौंपे. लाभार्थियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नौकरी दी गई. सरकार ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राज्य की हाल की सबसे बड़ी सार्वजनिक त्रासदियों में से एक से प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है.
यह कार्यक्रम उस समय हुआ, जब मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में इस मामले की सुनवाई चल रही थी. अदालत में पीड़ित परिवारों को स्थायी सरकारी नौकरी देने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की गई. अदालत ने निर्देश दिया कि लाभार्थियों को फिलहाल अस्थायी नियुक्तियां दी जा सकती हैं.
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