
नई दिल्ली:
सुष्मिता देव के बीजेपी में शामिल होते ही उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया गया. सुष्मिता के साथ ही बीजेपी में शामिल हुए सुखेन्दु शेखर रॉय और प्रकाश बराईक को भी राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया गया. इन तीनों नेताओं ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर राज्यसभा से इस्तीफा दिया था. राज्यसभा की इन तीन सीटों के लिए 24 जुलाई को चुनाव होना है. सुष्मिता देव का राजनीतिक करियर उतना लंबा नहीं है, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में जो हासिल कर लिया है, उसके लिए दूसरों को काफी वक्त लगेगा.
कांग्रेस से टीएमसी होते हुए बीजेपी में पहुंचीं सुष्मिता
सुष्मिता ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. जाहिर है राजनीति उन्हें विरासत में मिली है. पिता संतोष मोहन देव राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे और सुष्मिता देव की मां बिथिका देव भी विधायक रहीं. सुष्मिता देव 2014 में पहली बार कांग्रेस की टिकट पर असम के सिलचर से जीत कर लोकसभा में पहुंचीं, लेकिन 2019 के चुनाव में वो हार गईं.

कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में आईं थीं सुष्मिता
लेकिन अब यही सब ममता बनर्जी के साथ हो रहा है, जब उनकी पार्टी के नेता अपने अच्छे राजनीतिक भविष्य या करियर के लिए बीजेपी में जा रहे हैं. सुष्मिता देव ने भी यही किया. ममता बनर्जी ने सुष्मिता देव को 2021 में, जब वो कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में आईं थीं, उसी साल राज्यसभा भेजा. उसके बाद जब उनका कार्यकाल खत्म हुआ, तब उन्हें 2024 में फिर राज्यसभा दिया गया, जिसका कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन उन्होंने जून में राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस दोनों से इस्तीफा दे दिया.
बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन में सबसे आगे रहती थीं सुष्मिता देव
हालांकि सबसे मजेदार बात ये है कि संसद कवर करने वाले हर एक पत्रकार ने देखा है कि किस तरह जब भी तृणमूल कांग्रेस किसी मुद्दे पर सरकार या बीजेपी के खिलाफ संसद परिसर में धरना प्रदर्शन करती थी, तब सुष्मिता देव नारा लगाने वालों में सबसे आगे रहती थीं. इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन हो या तृणमूल कांग्रेस का, सुष्मिता देव के हाथों में बैनर और प्ले कार्ड जरूर होता था.

भारतीय राजनीति की ताजा ट्रेंड के लिए केवल सुष्मिता देव को ही दोषी ठहराना सही नहीं होगा, यही आज की राजनीति का नया फ्लेवर है. बिहार के मुख्यमंत्री, असम के मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री जैसे तमाम उदाहरण आज के दिनों में मौजूद हैं.
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