
मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर बुधवार (10 जून) को प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा, “यह ‘घर का भेदी लंका ढाए’ वाली कहावत का उदाहरण है.” उन्होंने कहा, “विपक्षी दल को यह झटका पार्टी के ही किसी व्यक्ति के कारण लगा है.”
राज्यसभा की तीन सीट पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पता चला कि नटराजन ने नामांकन पत्रों में फॉर्म 26 में अदालती शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था.
विधानसभा के अधिकारी ने दी यह जानकारी
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है. कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब ‘वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ‘सीट चोरी’ का मामला बन गया है. साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है.
मामले पर क्या बोले हेमंत खंडेलवाल?
खंडेलवाल ने कहा, “तेलंगाना में बीजेपी का शासन तो नहीं है, ऐसे में समझा जा सकता है कि नटराजन से संबंधित जानकारी कहां से और कैसे आई.” उन्होंने कहा, “आप दस्तावेजों को फॉर्म में संलग्न नहीं करते हैं और उन्हें हमें दे रहे हैं. तो यह कांग्रेस पार्टी की गलती है. कांग्रेस को बताना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया?”
खंडेलवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि ऐसा कौन सा बड़ा विवाद था, जिसके कारण उसके नेता का नामांकन पत्र खारिज करवा दिया गया.” जब उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं इस बारे में क्या कहूं? बस यही जान लीजिए कि घर का भेदी लंका ढाए.”
सीएम मोहन यादव ने किया था ये दावा
इससे पहले, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दावा किया था कि नटराजन का ‘खेल बिगाड़ने’ का काम उन्हीं की पार्टी के नेताओं ने किया क्योंकि उनमें से कई की नजर उस सीट पर थी. उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने ‘जानबूझकर’ और ‘षडयंत्रपूर्वक’ नटराजन के फॉर्म में गलतियां कीं.” उन्होंने दावा किया, “इस सीट पर कई सारे कांग्रेसियों की नजर थी. जब सीट नहीं मिली तो नटराजन का खेल बिगड़ने का काम कांग्रेसियों ने ही किया.”
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केलाश विजयवर्गीय ने क्या कहा?
राज्य सरकार के मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय भी दावा कर चुके हैं कि नटराजन मामले में तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं ने ही जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए थे. राज्य में राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों में से सत्तारूढ़ बीजेपी का दो सीटें जीतना तय था लेकिन नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद तीसरी सीट भी उसके खाते में जाती हुई दिख रही है.
बीजेपी ने महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है जबकि तीसरी सीट के लिए मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केवट उम्मीदवार हैं.
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