

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ वार्ता के बाद कहा कि ईरान न्यूक्लियर निगरानी पर राजी हो गया है. इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कर देगा. इसके साथ ही देर शाम खबर आई कि अमेरिका ने ईरान को क्रूड ऑयल बेचने पर लगे प्रतिबंधों में डील दे दी है.
वेंस ने दावा किया है कि ईरान की संपत्ति रिलीज करने पर अमेरिकी किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा. वेंस का कहना है कि अगर ईरान के फ्रीज किए गए पैसे पर से पाबंदी हटाई जाती है, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा फायदा किसी और को नहीं, बल्कि अमेरिकी किसानों को होगा. यह एक ऐसा रणनीतिक कदम साबित हो सकता है जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ अमेरिकी कृषि बाजार की तस्वीर बदल देगा.
स्विट्जरलैंड में प्रेस से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने इस पूरे गणित को बेहद आसान शब्दों में समझाया. उन्होंने कहा कि ईरान की संपत्ति को जारी करने की जो प्रस्तावित नीति है, उससे मिलने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा सीधे अमेरिकी बाजार में आएगा. इस कदम का मकसद सिर्फ एकतरफा फायदा उठाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस और संतुलित रणनीति काम कर रही है.
ईरान का पैसा और अमेरिकी खेती का कनेक्शन
जेडी वेंस के अनुसार, पाबंदी हटने के बाद ईरान को जो रकम मिलेगी, उसका इस्तेमाल वह अपनी मर्जी से हर जगह नहीं कर पाएगा. इस नीति के तहत यह अनिवार्य किया जाएगा कि ईरान उस फंड का इस्तेमाल अमेरिकी कृषि उत्पादों को खरीदने के लिए ही करे. इसका मतलब यह हुआ कि ईरान को मिलने वाला पैसा घूम-फिरकर वापस अमेरिका के ग्रामीण इलाकों और वहां के किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगा.
इस प्रस्तावित नीति के तहत ईरान मुख्य रूप से अमेरिकी सोयाबीन, मक्का और गेहूं की भारी मात्रा में खरीदारी करेगा. वेंस का मानना है कि इस फैसले से अमेरिकी कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐसा नया और विशाल बाजार खुल जाएगा, जिसकी किसानों को लंबे समय से तलाश थी. जब ईरान जैसा बड़ा देश अमेरिकी फसलें खरीदेगा, तो बाजार में मांग तेजी से बढ़ेगी.
किसानों की बंपर कमाई
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने साफ किया कि इस पैसे का इस्तेमाल किसी सैन्य या विवादित काम में नहीं होने दिया जाएगा. इस फंड से अमेरिकी अनाज खरीदकर ईरान की आम जनता तक पहुंचाया जाएगा. इससे वहां भुखमरी और खाद्य संकट से जूझ रहे लोगों को मानवीय सहायता मिल सकेगी. यानी एक तरफ जहां ईरान के आम नागरिकों को भोजन मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ यह नीति पूरी तरह सुरक्षित रहेगी.
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