खबर

आशा पारेख का 58 साल पुराना वो गाना जिसे लता मंगेशकर ने ठुकराया, आशा भोसले ने अपनी आवाज से बनाया कल्ट क्लासिक | Asha Parekh Parde Mein Rehne Do 58 year old song never lost charm rejected by Lata Mangeshkar it became a cult classic to Asha Bhosle voice



हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे रहे हैं, जो जमाने के साथ कभी पुराने नहीं हुए. बल्कि जमाने के साथ लोग उन्हें और ज्यादा पसंद करते गए हैं. 58 साल पहले एक गाना आया था, जो समय के साथ हमेशा से लोगों की जुबान पर चढ़ता गया. जमाने बीत गए लेकिन यह गाना कभी पुराना नहीं हुआ. यह गाना ‘पर्दे में रहने दो, पर्दा ना उठाओ…’ है. ये अल्फाज सुनते ही दिमाग में आशा पारेख की वो जादुई अदाएं, आशा भोसले की नशीली आवाज और शंकर-जयकिशन का अरबी अंदाज वाला म्यूजिक घूमने लगता है. 1968 की हिट थ्रिलर फिल्म ‘शिकार’ का ये गाना सिर्फ एक डांस नंबर नहीं, बल्कि बॉलीवुड का एक क्लासिक किस्सा है.  

फिल्म की कहानी

आत्मा राम द्वारा निर्देशित और प्रोड्यूस की गई ये मर्डर मिस्ट्री फिल्म धर्मेंद्र, आशा पारेख और संजीव कुमार की जोड़ी से सजी थी. फिल्म में धर्मेंद्र एस्टेट मैनेजर अजय सिंह बने हैं, जो एक हत्या की गुत्थी सुलझाने में लगे हैं. आशा पारेख किरण के रोल में हैं, जिनके पास अहम सबूत हैं. इसी बीच स्टेज पर ये गाना आता है, पर्दे में छुपे राजों का इशारा. हसरत जयपुरी के बोल और शंकर-जयकिशन का संगीत मिलकर ऐसा नशा बनाते हैं कि आज भी ये गाना ताजा लगता है.  

आशा भोसले का फिल्मफेयर अवॉर्ड और लता जी का इनकार 

‘पर्दे में रहने दो, पर्दा ना उठाओ…’ की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे मूल रूप से लता मंगेशकर को ऑफर किया गया था. लेकिन लता जी को बोल थोड़े रिस्की लगे, इसलिए उन्होंने मना कर दिया. फिर ये मौका छोटी बहन आशा भोसले के पास आया. आशा ने गाने को इतने कमाल से गाया कि 1969 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार जीत लिया. ये उनका लगातार दूसरा फिल्मफेयर था. ‘पर्दे में रहने दो, पर्दा ना उठाओ…’  गाने को बिनाका गीतमाला 1968 की वार्षिक लिस्ट में 9वें नंबर पर जगह मिली.  

फिल्म की कास्ट

‘शिकार’ में धर्मेंद्र, आशा पारेख, संजीव कुमार, हेलेन, रहमान, जॉनी वॉकर, बेला बोस और रमेश देव जैसे कलाकार थे. फिल्म ने 1969 के फिल्मफेयर में चार अवॉर्ड्स बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (संजीव कुमार), बेस्ट कॉमेडियन (जॉनी वॉकर), बेस्ट साउंड और आशा भोसले का गाना जीता था. बॉक्स ऑफिस पर ये हिट साबित हुई और 1968 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म बनी. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक नेट कलेक्शन करीब 1.5 करोड़ और ग्रॉस 3 करोड़ के आसपास रहा. कोलकाता में एक थिएटर में लंबे समय तक चली.  

आज भी याद रहता है ये गाना 

आशा पारेख को खुद इस गाने को लेकर थोड़ी हिचकिचाहट थी, क्योंकि उस दौर के हिसाब से बोल और सीन दोनों में थोड़े अलग थे. लेकिन फिल्म और गाना दोनों हिट हो गए. पर्दे के पीछे छुपे जलवे, नकाब उठाने का खतरा और ‘अल्लाह मेरी तौबा’ का दोहराव ये सब मिलकर गाने को यादगार बना देते हैं. आज भी जब ये गाना बजता है तो लोग उसी जादुई माहौल में खो जाते हैं.

ये भी पढ़ें; 2 साल पहला आए वो गाना जिसको यूट्यूबर पर देखा गया 100 करोड़ बार, हॉरर-कॉमेडी फिल्म की बना जान, रेडियो पर आज भी है डिमांड




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button