
जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और सूखे का सीधा असर अब फ्रांस की मशहूर वाइन इंडस्ट्री पर भी दिख रहा है. फ्रांस के कृषि मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि 2026 में वाइन का प्रोडक्शन 70 साल के निचले स्तर पर आ सकता है, जो प्रोडक्शन में कमी का लगातार तीसरा साल होगा. इस गिरावट के साथ, यह इंडस्ट्री आर्थिक संकट का सामना कर रही है. फ्रांस के कृषि मंत्रालय के मुताबिक, खराब मौसम की वजह से इस साल वाइन के प्रोडक्शन में भारी कमी आ सकती है. जलवायु परिवर्तन फ्रांस के ज्यादातर प्रमुख वाइन-उत्पादक क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है. जलवायु परिवर्तन का असर अंगूर के पकने और उनकी कटाई के वक्त पर पहले से ही दिखने लगा है. फ्रेंच वाइन यूनियन के मुताबिक, इस साल बरगंडी इलाके में अंगूर की कटाई 14 अगस्त से शुरू हुई. यह इस इलाके के इतिहास में अब तक की सबसे जल्दी होने वाली कटाई है.

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फ्रांस के सभी वाइन-उत्पादक इलाकों पर जलवायु परिवर्तन का असर एक जैसा नहीं रहा है. लोयर वैली और शैम्पेन जैसे इलाके, जो आम तौर पर ठंडे और समशीतोष्ण माने जाते हैं, वहां गर्मी का ज्यादा असर देखा गया है. हालांकि, दक्षिणी फ्रांस के कुछ इलाकों, जैसे कि Bordeaux और Languedoc-Roussillon में पिछले साल के मुकाबले उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है.
पांच साल में 17% कम प्रोडक्शन…
सरकारी स्टैटिक्स एजेंसी Agreste के आंकड़ों के मुताबिक, अनुमान है कि इस साल फ्रांसीसी वाइन निर्माता 34 मिलियन हेक्टोलिटर से कम वाइन का प्रोडक्शन करेंगे, जो 2025 की तुलना में 6% और पिछले पांच सालों के औसत की तुलना में 17% कम है. इसका मुख्य कारण फ्रांस के इतिहास की सबसे गर्म गर्मी थी, जिसके कारण पूरे देश में हीटवेव चली और तापमान बार-बार 40°C से ऊपर पहुंच गया. सूखी मिट्टी, तेज धूप से अंगूरों के झुलसना और बेलों के सूखने की वजह से फसल काटने वाली टीमों के पहुंचने से पहले ही अंगूर के फल सूखने लगे. इससे वसंत के मौसम में अच्छी फसल होने की उम्मीद खत्म हो गई.

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इंडस्ट्री पर आर्थिक संकट!
जलवायु संकट का असर सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं है. उत्पादन की बढ़ती लागत, बिक्री में कमी और घरेलू खपत में गिरावट ने इंडस्ट्री की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 और 2025 के बीच वाइन इंडस्ट्री में कारोबार बंद होने की तादाद करीब तीन गुना बढ़ गई. आशंका जताई जा रही है कि इंडस्ट्री के लिए 2026 भी एक मुश्किल भरा साल हो सकता है.
इस तरह, फ्रांस की वाइन इंडस्ट्री अभी कई चुनौतियों का सामना कर रही है. इसमें जलवायु परिवर्तन की वजह से उत्पादन चक्र में बदलाव, भीषण गर्मी और सूखा, कड़े पारंपरिक नियम, बढ़ती लागत और घरेलू मांग में कमी शामिल हैं. आने वाले दिनों में यह इंडस्ट्री बदलते क्लाइमेट के हिसाब से अंगूर की किस्मों, खेती के तरीकों और बाजार की रणनीतियों को कितनी तेजी से ढाल पाता है, यह इसके भविष्य के लिए बहुत अहम होगा.

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ग्लोबल मार्केट पर होगा असर!
फ्रांस दुनिया में बेहतरीन वाइन के सबसे बड़े एक्सपोर्टर्स में से एक है, इसलिए इतने बड़े पैमाने पर फसल की कमी से ग्लोबल सप्लाई चेन में वाइन की तादाद में भारी कमी आएगी. इस नुकसान का सबसे ज्यादा असर ठंडे और हल्के तापमान वाले इलाकों पर पड़ा है.
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