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आने वाले सालों में फट सकती हैं हिमालय की ग्लेशियर झीलें! UN की चेतावनी- भारत के लाखों लोग खतरे में | UN Warns Himalayan Glacial Lakes Could Burst in Coming Years Millions in India and Nepal at Risk



नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है. इस बीच UN ने एक बड़ी चेतावनी दी है. यूएन के असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल ने चेतावनी दी है कि हिमालयी इलाके को भविष्य में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ का गंभीर खतरा है.

‘नदी के किनारे रहने लायक नहीं रहेंगे’

नेपाल-तिब्बत में आई बाढ़ ने पनबिजली (हाइड्रोपावर) सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया है, जिससे नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 10% हिस्सा ठप हो गया है. अब यह डर सता रहा है कि जिन नदी के किनारों पर लाखों लोग रहते हैं, वे इलाके रहने लायक नहीं रह जाएंगे.

‘टेक्नोलॉजी उतनी तेज नहीं’

रॉयटर्स समाचार एजेंसी से बात करते हुए कन्नी विग्नराजा ने कहा, ‘ग्लेशियर झीलों के ओवरफ्लो से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए टेक्नोलॉजी उतनी तेजी से काम नहीं कर सकती.’ रिसर्चर्स ने 2020 में नेपाल, चीन और भारत में 47 ऐसी ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी, जिनसे खतरा हो सकता है. लेकिन अब माना जा रहा है कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा है.

विग्नराजा ने जून में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम और सहयोगी संगठनों द्वारा इकट्ठा किए गए नए डेटा का हवाला देते हुए कहा कि खतरे में पड़ी आबादी लाखों में है. पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ तब आई जब लांगटांग लिरुंग पर्वत चोटी के पास एक ग्लेशियर का कुछ हिस्सा टूटकर घाटी में गिर गया, जिससे भूस्खलन हुआ और त्रिशूली नदी में बाढ़ की लहर आ गई.

ग्लेशियर झील के फटने की घटना तब होती है जब पिघले हुए ग्लेशियर का पानी किसी प्राकृतिक रुकावट के पीछे जमा हो जाता है और दबाव बढ़ने पर वह रुकावट टूट जाती है या पानी बाहर बहने लगता है, जिससे अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आ जाती है.

UN अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों खतरे बढ़ रहे हैं, क्योंकि जलवायु संकट के कारण इस इलाके में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे चट्टानें ढीली हो रही हैं और ग्लेशियर झील की रुकावटों पर दबाव बढ़ रहा है.

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