
हिमाचल प्रदेश के लंबित वित्तीय भुगतान को लेकर पेंशनरों ने मंगलवार (1 सितंबर) को विधानसभा के बाहर धरना प्रदर्शन किया. राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में राज्यस्तरीय धरना-प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में पेंशनर्स पहुंचे. दरअसल, पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पेंशनर इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे और सरकार से लंबित वित्तीय देनदारियों का जल्द भुगतान करने की मांग उठाई .
प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने लंबित डीए/डीआर एरियर, संशोधित वेतनमान के बकाया तथा चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान की मांग को उठाया. समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
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क्यों धरने पर बैठे पेंशनर?
पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि यह आंदोलन किसी अतिरिक्त सुविधा या विशेष रियायत की मांग के लिए नहीं, बल्कि पेंशनरों के लंबे समय से लंबित अर्जित वित्तीय अधिकारों की प्राप्ति के लिए किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से लंबित महंगाई भत्ते (DA) के एरियर का भुगतान पेंशनरों की सबसे बड़ी मांग है. इसके अलावा संशोधित वेतनमान के तहत बकाया राशि को एकमुश्त जारी करने की भी मांग की गई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय देनदारियों के भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण प्रदेशभर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है. पेंशनरों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित बिलों का जल्द निपटारा करने और अन्य सभी बकाया वित्तीय मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की मांग भी उठाई.
सरकार को दी चेतावनी
समिति ने कहा कि सरकार को पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर पहल करनी चाहिए. यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. पेंशनरों ने स्पष्ट किया कि अपने वित्तीय अधिकारों की प्राप्ति तक उनका संघर्ष जारी रहेगा.
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में करीब डेढ़ लाख पेंशनर हैं. ऐसे में उनकी नाराजगी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. हालांकि, यह राजनीतिक विश्लेषण का विषय है कि आगामी चुनावों से पहले सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान को लेकर कोई बड़ा फैसला लेती है या नहीं.
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