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आंखों से कह रहे दिल की बात, घुटनों से कटे पैर, पैरा कमांडो कर्नल अनुराग उपाध्याय की दर्दभरी दास्तान | colonel anurag upadhyay para commando locked in syndrome treatment help


कर्नल अनुराग उपाध्याय… भारतीय सेना के वो जांबाज पैरा कमांडो, जिन्होंने करोड़ों का पैकेज छोड़कर भारतीय सेना में स्पेशल फोर्सेज को चुना. आज देश का यह हीरो खुद अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर कर्नल अनुराग उपाध्याय की दर्दभरी कहानी शेयर करते हुए श्रद्धा शर्मा नामक यूजर ने लिखा है कि कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिन्हें हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. ऐसी ही कहानी अनुराग उपाध्याय की है.

CAT में 99 परसेंटाइल

श्रद्धा शर्मा ने आगे लिखा कि अनुराग उपाध्याय ने कैट परीक्षा में 99 परसेंटाइल हासिल किया था. इतने शानदार अंकों के साथ उन्हें किसी भी कॉर्पोरेट कंपनी में अच्छी नौकरी और बेहतरीन पैकेज आसानी से मिल जाता, मगर उन्होंने देश सेवा के लिए भारतीय सेना को चुना. 

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12 पैरा SF के जांबाज कर्नल अनुराग उपाध्याय की दर्दभरी दास्तान Photo Credit: sharmashradha/linkedin

2008 में आया हार्ट अटैक

अनुराग उपाध्याय भारतीय सेना में शामिल हुए और स्पेशल फोर्सेज में कमांडो बने. उन्होंने 3 पैरा (SF) के साथ प्रोबेशन पूरा किया. इसके बाद 12 पैरा की शुरुआती टीम में शामिल होकर कई महत्वपूर्ण अभियानों को अंजाम दिया. साल 2008 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने खुद को रिकवर किया और वापस ड्यूटी पर लौटे. 

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12 पैरा SF के हीरो कर्नल अनुराग उपाध्याय के ल‍िए मांगी जा रही न्यूरोलॉजिस्ट की मदद     Photo Credit: sharmashradha/linkedin

2025 में पोस्टीरियर सर्कुलेशन स्ट्रोक

हार्ट अटैक से उबरने के बाद कर्नल अनुराग उपाध्याय की जिंदगी साल 2025 में फिर से दांव पर लग गई. पिछले साल अगस्त में उन्हें ‘पोस्टीरियर सर्कुलेशन स्ट्रोक’ हुआ और आज वे ‘लॉक-इन सिंड्रोम’ से पीड़ित हैं. इसका उनके शरीर पर गंभीर असर पड़ा है और वे हिलने-डुलने या बोलने में पूरी तरह असमर्थ हैं. दिमाग सही-सलामत होने के बावजूद वे सामान्य तरीके से बात करने में असहाय हैं. वे केवल आंखों की हरकत और अक्षर-आधारित स्कैनिंग के जरिए अपनी बात कह पाते हैं. इसके अलावा, उनके घुटनों के नीचे से दोनों पैर काटने पड़े हैं. 

मदद और न्यूरोलॉजिस्ट की अपील

कर्नल अनुराग उपाध्याय को ऐसे न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो-रिहैबिलिटेशन स्पेशलिस्ट की सख्त जरूरत है, जो लॉक-इन सिंड्रोम या इस तरह के जटिल मामलों के विशेषज्ञ हों. पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों से भी उनकी मदद की अपील की जा रही है.  

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डिस्क्लेमर: यह लेख कर्नल अनुराग उपाध्याय से जुड़ी अपील में साझा की गई जानकारी और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है. एनडीटीवी टीम उनकी सैन्य सेवा के इतिहास, मेडिकल रिकॉर्ड, बीमारी के निदान या उपचार से जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करती है.  




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