
भारत में एक ऐसा परिवार भी है, जो पिछले 140 वर्षों से लगातार देश की सेवा कर रहा है. इस परिवार की हर पीढ़ी की रगों में देशभक्ति का खून दौड़ रहा है. अब अपने परिवार की इस महान और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी शिवम अहलावत ने उठाई है. शिवम भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं.
शिवम अहलावत मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले के बेरी ब्लॉक स्थित गोच्छी गांव के रहने वाले हैं. भारतीय सेना जॉइन करने की अहलावत परिवार की यह अनूठी परंपरा 5 सितंबर 2026 को ओटीए (OTA) चेन्नई में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद से एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है.
‘स्किनर्स हॉर्स’ रेजीमेंट में दादा-परदादा भी रहे तैनात
शिवम अहलावत को भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 1 हॉर्स (स्किनर्स हॉर्स) रेजीमेंट में कमीशन प्राप्त हुआ है. खास बात यह है कि लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत भी उसी रेजीमेंट में अधिकारी बने हैं, जिसमें उनके दादा और परदादाओं ने अपनी सेवाएं दी थीं. एक ही परिवार की कई पीढ़ियों द्वारा एक ही रेजीमेंट में निरंतर सेवाएं देने के इस असाधारण रिकॉर्ड के कारण अहलावत परिवार का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज हो चुका है.
1886 से शुरू हुआ था सैन्य सेवा का सिलसिला
अहलावत परिवार के सेना में जाने का सिलसिला 140 साल पहले श्योचंद अहलावत से शुरू हुआ था. यह गौरवशाली सफर कैप्टन दरियाओ सिंह अहलावत, लेफ्टिनेंट कर्नल शमशेर सिंह अहलावत और कर्नल संदीप अहलावत से होते हुए अब लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत तक आ पहुंचा है. इस परिवार के जांबाज बेटों ने विश्व युद्ध से लेकर कारगिल जैसी महत्वपूर्ण जंगों में भारत माता की रक्षा करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया है.

सबसे पहले 1886 में श्योचंद अहलावत फौजी बने, अब 5 सितंबर 2026 को शिवम अहलावत भी उनकी तरह लेफ्टिनेंट बने हैं.
वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में रहता है परिवार
गोच्छी गांव के पूर्व सरपंच राजेश सिंह ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि अहलावत परिवार मूल रूप से उनके ही गांव से है, लेकिन वर्तमान में परिवार के सदस्य गांव के बजाय दिल्ली-एनसीआर में निवास करते हैं. उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे गांव और क्षेत्र को इस बात पर मान है कि यह परिवार बीते कई दशकों से लगातार देश की सीमा पर अपनी सेवाएं दे रहा है. करीब पांच हजार मतदाताओं वाले इस गांव में 140 साल से सेना फौजी देने वाले इस परिवार पर सबको गर्व है.
अहलावत परिवार की 5 पीढ़ियां
1. श्योचंद अहलावत (प्रथम पीढ़ी)
वर्ष 1886 में लेफ्टिनेंट श्योचंद अहलावत ने ‘थर्ड स्किनर्स’ जॉइन की और लगभग 32 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं. उन्होंने काबुल-कंधार के कई कठिन और विशेष सैन्य अभियानों में साहसिक हिस्सा लिया था.
2. दरियाओ सिंह अहलावत (दूसरी पीढ़ी)
1918 से 1948 तक सेना में सेवाएं देने वाले कैप्टन दरियाओ सिंह अहलावत ने द्वितीय विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया. युद्ध के दौरान वे इटली में तैनात रहे और अपनी वीरता का परिचय दिया.
3. शमशेर सिंह अहलावत (तीसरी पीढ़ी)
दिसंबर 1955 में भारतीय सेना में शामिल हुए लेफ्टिनेंट कर्नल शमशेर सिंह अहलावत ने वर्ष 1961 में गोवा, दमन और दीव मुक्ति अभियान के साथ-साथ वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई. वर्ष 1982 में सेवानिवृत्त हुए शमशेर सिंह के बारे में कहा जाता है कि 1965 की जंग में उन्होंने शेर की तरह दुश्मनों का सामना किया था. भीषण गोलाबारी में उनका टैंक नष्ट हो गया था और इस दौरान उन्होंने अपनी बाईं आंख भी गंवा दी थी.
4. संदीप अहलावत (चौथी पीढ़ी)
वर्ष 1993 में अहलावत परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में कर्नल संदीप अहलावत भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुए. उन्होंने वर्ष 1999 में ‘ऑपरेशन विजय’ (कारगिल युद्ध) के दौरान 16 हजार फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
5. शिवम अहलावत (पांचवीं पीढ़ी)
अब अहलावत परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप में शिवम अहलावत ने भारतीय सेना जॉइन की है. वे ओटीए चेन्नई से पास आउट होकर लेफ्टिनेंट बने हैं और अपने परिवार की 140 साल पुरानी इस ऐतिहासिक सैन्य विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ा रहे हैं.
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