
Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में देवी-देवता की कृपा प्राप्ति और जीवन को संतुलित बनाने के लिए एकादशी व्रत को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. अभी आषाढ़ माह चल रहा है. इसमें योगिनी एकादशी व्रत करने वालों को 88 हजार ब्राह्मण भोजन कराने के समान पुण्य मिलता है, योगिनी एकादशी व्रत 10 जुलाई को है. ऐसे में व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए किस समय पूजन करें, पूजा विधि, नियम, कथा कब पारण करें जान लें.
योगिनी एकादशी का महत्व
एकादशी व्रत को सनातन धर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु को प्रसन्न करने वाला सर्वोत्तम व्रत माना गया है. पद्म पुराण के अनुसार न गायत्र्याः परं मन्त्रं न मातुः परदैवतम्. न काश्याः परं तीर्थं नैकादश्याः समं व्रतम्॥ अर्थात- जैसे गायत्री मंत्र से बढ़कर कोई मंत्र नहीं, माता से बढ़कर कोई देवता नहीं और काशी से श्रेष्ठ कोई तीर्थ नहीं, उसी प्रकार एकादशी से श्रेष्ठ कोई व्रत नहीं है.
पुराणों में इसका महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पापों के नाश, मन की शुद्धि, इंद्रियों के संयम और अंततः मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया गया है.
योगिनी एकादशी का समय
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी कृतिथि 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो रही है और इसका समापन 11 जुलाई 2026 को सुबह 5.22 मिनट पर होगा.
इस बार योगिनी एकादशी पंचांग अनुसार दो दिन है. 10 जुलाई को एकादशी पूरे दिन रहेगी. गृहस्थ जीवन वालों को इसी दिन व्रत करना चाहिए. वहीं वैष्णव संप्रादय वाले 11 जुलाई को एकादशी मनाएंगे.
- पारण समय – 11 जुलाई दोपहर 1.50 से शाम 4.36 मिनट के बीच होगा. वहीं 12 जुलाई को सुबह 5.32 से सुबह 8.18 के बीच गौण एकादशी का पारण किया जाएगा.
दो दिन एकादशी हो तो क्या करें
कभी-कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिये हो जाता है. जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिये. दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं. संन्यासियों, विधवाओं तथा मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिये. जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी एवं वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं.