
बिहार में गया और नालंदा जिलों के डीएम सिर्फ बैचमेट IAS अधिकारी ही नहीं, बल्कि जीवनसाथी भी हैं. संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2013 में शशांक शुभंकर को अखिल भारतीय स्तर पर 60वीं रैंक और उदिता सिंह को 46वीं रैंक मिली थी. बिहार कैडर में साल 2014 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शशांक शुभंकर और उदिता सिंह ने वर्ष 2017 में शादी की थी. दोनों एक ही बैच के अधिकारी होने की वजह से इस IAS पावर कपल की शादी को प्रेम विवाह के रूप में भी देखा जाता है.
बिहार के इस पावर कपल की चर्चा आज हम इसलिए कर रहे हैं कि बिहार के गयाजी में पितृपक्ष 25 सितंबर 2026 से शुरू होने वाला है. देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए यहां पहुंचने लगे हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है, तो जिला प्रशासन के लिए भीड़, यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधाओं की बड़ी परीक्षा है. इस पूरे आयोजन की प्रशासनिक जिम्मेदारी इस समय गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के कंधों पर है. वहीं, करीब 75 से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिहार की प्राचीन ज्ञानभूमि नालंदा की कमान इनकी आईएएस पत्नी उदिता सिंह के हाथ में हैं.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई से IAS तक
मूल रूप से झारखंड के रहने वाले शशांक शुभंकर ने रांची के डीएवी स्कूल से पढ़ाई की. उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने VIT वेल्लोर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बीटेक में गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और बिहार कैडर के IAS अधिकारी बने. शशांक के प्रशासनिक करियर में केंद्र सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्रेटरी की जिम्मेदारी भी शामिल रही है. वे भोजपुर में उप विकास आयुक्त रहे और अगस्त 2019 में समस्तीपुर के जिलाधिकारी बनाए गए. बाद में उन्हें नालंदा का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया. वर्तमान में वे गया के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं.

पितृपक्ष में गया की कमान संभाल रहे DM शशांक, नालंदा की जिम्मेदारी पत्नी उदिता के हाथ; 2014 बैच के IAS कपल की प्रेरक कहानी
गयाजी में इस समय क्यों चर्चा में हैं शशांक?
गया का डीएम पद अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन पितृपक्ष के दौरान इसकी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है. लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को यातायात, आवास, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और तीर्थस्थलों पर भीड़ प्रबंधन जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ता है. पितृपक्ष 2026 को लेकर शशांक शुभंकर के नेतृत्व में प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं. आवास और यात्रा से जुड़े पैकेज, ट्रैफिक प्रबंधन तथा मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं को लेकर तैयारियां की गई हैं. यही वजह है कि सितंबर 2026 में शशांक शुभंकर एक बार फिर चर्चा में हैं.
उदिता सिंह की UPSC में असफलता के बाद वापसी
उदिता सिंह की कहानी संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के एक ऐसे पड़ाव से जुड़ी है, जो युवाओं के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है. बिहार के बांका जिले के गोराडीह की रहने वाली उदिता सिंह ने पटना से मैट्रिक की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कोटा से इंटरमीडिएट किया और IIT दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. उनका पहला प्रयास सफल नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी. दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 46 हासिल की और IAS के लिए चयनित हुईं.

प्रशासन में अलग-अलग जिम्मेदारियां
IAS बनने के बाद उदिता सिंह ने कई प्रशासनिक पदों पर काम किया. वे अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त और अन्य प्रशासनिक पदों पर रहीं. नवादा, वैशाली और रोहतास की जिलाधिकारी के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली. नालंदा की डीएम बनने से पहले वे रोहतास की जिलाधिकारी थीं. जून 2026 में उन्हें नालंदा का जिलाधिकारी बनाया गया. हालांकि, नालंदा उनके लिए नया जिला नहीं है. वर्ष 2024 में वे यहां जिला बंदोबस्त पदाधिकारी के रूप में कार्य कर चुकी हैं. उस समय उनके पति शशांक शुभंकर नालंदा के जिलाधिकारी थे.
गयाजी की आस्था और नालंदा की विरासत
नालंदा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है, जबकि गयाजी बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार का गृह जिला है. गया और नालंदा दोनों बिहार की पहचान से जुड़े जिले हैं, लेकिन दोनों की प्रशासनिक प्रकृति अलग है. गयाजी में पितृपक्ष के दौरान धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधाएं सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो जाती हैं. यहां प्रशासन को कम समय में बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं.
वहीं, नालंदा की चुनौती अलग है. यह दुनिया की प्राचीन शिक्षा परंपरा की पहचान रखने वाला क्षेत्र है. नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ पर्यटन, शिक्षा, स्थानीय विकास और रोजमर्रा के प्रशासन की जिम्मेदारी भी जिलाधिकारी के सामने रहती है. दोनों अधिकारी आज बिहार के दो महत्वपूर्ण जिलों की कमान संभाल रहे हैं. एक तरफ शशांक शुभंकर पितृपक्ष जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के प्रबंधन में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ उदिता सिंह नालंदा जैसे ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले का नेतृत्व कर रही हैं. यही वजह है कि यह IAS दंपति इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है.
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