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Success Story : बिहार के लाल का कमाल, सब्जी बेच, ई रिक्शा चलाकर भी कॉमनवेल्थ गेम्स में रच दिया इतिहास | commonwealth games para-powerlifting medalist Jhandu Kumar struggle and success story


बिहार के झंडू कुमार आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उनकी संघर्ष से सफलता तक के किस्से हर किसी की जुबान पर हैं. हो भी क्यों ना, झंडू कुमार ने पैरा-पावरलिफ्टिंग में देश को पहला पदक जो दिलाया है. झंडू यहां तक ऐसे ही नहीं पहुंचे. इसके लिए उनको बहुत ही संघर्षों से गुजरना पड़ा है. कोरोना माहमारी के दौरान परिवार का पेट पालने के लिए उन्होंने कभी सब्जियां बेचीं तो कभी ई रिक्शा चलाया. लेकिन उन्होंने गरीहबी को अपने हौसलों के आड़े नहीं आने दिया. झंडू ने आखिर वो हासिल कर ही लिया, जिसके वो हकदार थे. 

झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया पदक

झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पदक दिलाकर अपने राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने पैरा पावरलिफ़्टिंग में  ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.उन्होंने देश के लिए हैवीवेट वर्ग में 130.9 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. ये झंडू के करियर का पहला इंटरनेशनल पदक है. इस जीत पर वह काफी भावुक हो गए.

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झंडू के पिता बेचते हैं सब्जी

झंडू कुमार के माता-पिता बिहार के नालंदा में सब्जी बेचने का काम करते हैं. कोरोना महामारी में उन्होंने भी घर चलाने के लिए सड़क किनारे इस काम में साथ दिया. पेट पालने के लिए उनको ई रिक्शा तक चलाना पड़ा. लेकिन अब वे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं. 

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‘हवा में उड़ रहा हूं’

पदक जीतने के बाद झंडू ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे वे हवा में उड़ रहे हों. उनका लक्ष्य किसी भी हाल में पदक जीतना था, जो उन्होंने पूरा कर लिया. 

पोलियो ने छीनी पैरों की पावर

झंडू जब पांच साल के थे तब वह पोलियो की चपेट में आ गए. जिसके बाद उनका जीवन बहुत ही संघर्षों भरा रहा. दिल में अपने पौरों पर खड़े न हो पाने का दर्द था. लेकिन उन्होंने अपनी मंजिल तलाश ही ली.’पैरा पावरलिफ्टिंग’ने उनकी जिंदगी बदल दी.अब वे देश के प्रमुख पैरा पावरलिफ्टरों में शुमार हो चुके हैं. झंडू पुरुषों के 72 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुके हैं. झंडू ने अपनी पहली कोशिश में 181 किग्रा वजन उठाया और फिर बाद में 190 किग्रा वजन उठाने में कामयाब रहे. उन्होंने अपनी आखिरी लिफ्ट में 196 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके. नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 208 किग्रा वजन उठाकर गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया. सिल्वर मेडल इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 199किग्रा वजन उठाकर जीता. झंडू ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल हासिल कर इतिहास रच दिया. 

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