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Success Story: अंधेरी दुनिया को गायकी से किया रोशन, बिना ट्रेनिंग 100 राग सीखने वाली वैकोम विजयलक्ष्मी ने जीता नेशनल अवॉर्ड | From Darkness to National Glory Singer Vaikom Vijayalakshmi Success Story Wins National Award After Mastering 100 Ragas Without Formal Training



नई दिल्ली:

केरल की मशहूर सिंगर वैकोम विजयलक्ष्मी की करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल हो गई है. उन्हें 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर’ का पुरस्कार गाने ‘अंगु वानक्कोणिल’ (फिल्म ARM) के लिए मिला है. जन्म से दिव्यांग (दृष्टिबाधित) विजयलक्ष्मी ने अपनी सुरीली आवाज और गायत्री वीणा की महारत से संगीत जगत को जीता. मलयालम, तमिल समेत कई भाषाओं में सैकड़ों गाने गा चुकी इस गायिका के लिए यह सम्मान संघर्ष की जीत है. पुरस्कार मिलते ही उन्होंने कहा, “संगीत मेरी सांस है. यह मेरे माता-पिता और गुरुओं को समर्पित है.’ 

विजयादशमी के दिन जन्म, नाम पड़ा विजयलक्ष्मी

7 अक्टूबर 1981 को विजयादशमी के पावन दिन वैकोम (कोट्टायम, केरल) में जन्मी विजयलक्ष्मी जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं. उनका जन्म विजयादशमी पर हुआ, इसलिए नाम विजयलक्ष्मी पड़ा. ऑप्टिक नर्व डैमेज के कारण उनकी दृष्टि कभी ठीक नहीं हो सकी, लेकिन उनके माता-पिता मुरलीधरन और विमला ने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने बेटी को संगीत की शिक्षा दी. मात्र डेढ़ साल की उम्र में के.एस. चित्रा के गाने ‘नानोरु सिंधु’ को दोहराते हुए विजयलक्ष्मी ने सबको चौंका दिया था. पांच साल की उम्र में उन्होंने अपना अरंगेत्रम (मंच पर पहली बार कदम रखा) किया. छह साल की उम्र में मुंबई के शानमुखानंदा हॉल में परफॉर्मेंस दी.

बिना ट्रेनिंग सीख लिए 100 से ज्यादा राग

विजयलक्ष्मी ने बिना औपचारिक प्रशिक्षण के 100 से ज्यादा राग सीख लिए. विजयलक्ष्मी ने बचपन में के.जे. येशुदास के टेप सुन-सुनकर राग सीखे. उनके पिता ने एक साधारण थंबुरु को संशोधित करके ‘गायत्री वीणा’ बनाई, एक स्ट्रिंग वाला दुर्लभ वाद्य यंत्र. विजयलक्ष्मी गायत्री वीणा में निपुण हैं. 2017 में उन्होंने गायत्री वीणा पर लगातार 5 घंटे 67 गाने बजाकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया. उन्होंने 450 से ज्यादा भक्ति गीत और 200 से ज्यादा फिल्मी गाने गाए हैं. मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी, बंगाली और संस्कृत, कई भाषाओं में उनकी आवाज गूंजी है. उन्होंने बाहुबली फिल्म में भी गाना गाया है.

यूं हुई पुरस्कार जीतने की शुरुआत

2012 में फिल्म सेलुलॉइड के ‘काट्टे काट्टे’ गाने के लिए उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में स्पेशल जूरी मेंशन मिला. 2013 में नादन के ‘ओट्टक्कु पदुन्ना’ के लिए बेस्ट सिंगर अवॉर्ड. फिल्मफेयर, SIIMA, वनिता अवॉर्ड्स समेत कई सम्मान उनके नाम हैं. अब राष्ट्रीय स्तर पर यह पुरस्कार उनकी यात्रा का शिखर है.

उतार-चढ़ाव भरी रही पर्सनल लाइफ

2016 में हुई मंगनी टूट गई क्योंकि मंगेतर ने उनकी दिव्यांगता को लेकर अपमान किया और संगीत छोड़ने को कहा. विजयलक्ष्मी ने अपने संगीत को चुना और उसे चलता कर दिया. 2018 में मिमिक्री आर्टिस्ट ए. अनूप से शादी हुई, लेकिन 2021 में तलाक हो गया. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. उनके माता-पिता ही उनकी आंखें, सहारा और प्रेरणा बने रहे. वे कहती हैं, ‘मेरे माता-पिता मेरी आंखें हैं. मैं भगवान, वैकथप्पन और नागचामुंडेश्वरी पर भरोसा रखती हूं.’





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