

घर में भाई-बहनों के बीच छोटी-मोटी लड़ाई होना आम बात है. कभी खिलौनों को लेकर झगड़ा होता है तो कभी किसी बात पर बहस हो जाती है. लेकिन अगर यह लड़ाई बार-बार होने लगे और दोनों बच्चों के रिश्ते में दूरी आने लगे, तो इसकी वजह सिर्फ बच्चे नहीं होते. कई बार माता-पिता की एक छोटी-सी गलती भी इसकी वजह बन जाती है. फेमस पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने इसे लेकर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. आइए जानते हैं अपनी इस पोस्ट में पेरेंटिंग कोच क्या कहती हैं-
ये एक गलती बनती है वजह
पेरेंटिंग कोच कहती हैं, जब घर में बड़े बच्चे को हमेशा जिम्मेदार और छोटे बच्चे को हमेशा ‘सबसे छोटा’ समझकर ट्रीट किया जाता है, तभी भाई-बहनों के बीच मनमुटाव शुरू होने लगता है.
बड़े बच्चे पर ज्यादा जिम्मेदारी डालना सही नहीं
रिद्धि देवराह कहती हैं, अक्सर घरों में बड़े बच्चे से कहा जाता है कि वह पहले अपनी चीजें शेयर करे, पहले माफी मांगे, पहले समझदारी दिखाए और हर बात को शांत होकर संभाले. माता-पिता सोचते हैं कि वह बड़ा है, इसलिए उसे ज्यादा समझदार होना चाहिए. लेकिन यह बात भूल जाते हैं कि वह भी अभी बच्चा ही है. उसे भी समय चाहिए, उसे भी गुस्सा आता है और उससे भी गलतियां हो सकती हैं. अगर हर बार उसी से समझौता करने की उम्मीद की जाए, तो उसके मन में दुख और नाराजगी बढ़ सकती है.
छोटे बच्चे पर भी पड़ता है गलत असर
वहीं, जब छोटे बच्चे को हमेशा यह महसूस कराया जाता है कि बड़ा भाई या बहन उसकी मदद करेगा या उसके लिए अपनी बात छोड़ देगा, तो वह धीरे-धीरे यही सीखने लगता है कि हर बार कोई दूसरा उसके लिए एडजस्ट करेगा. दूसरी तरफ बड़ा बच्चा यह सोचने लगता है कि घर में सबको खुश रखना उसी की जिम्मेदारी है. ये दोनों बातें बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए सही नहीं हैं.
क्या करें माता-पिता?
पेरेंटिंग कोच कहती हैं, बड़ा भाई या बहन माता-पिता की जगह नहीं ले सकते. उसे भी खेलना, मस्ती करना, गलती करना और अपनी बात कहने का अधिकार होता है. इसलिए उसे हमेशा दूसरों के लिए उदाहरण बनाकर न रखें. अगर वह कभी गलती करे, तो उसे डांटने या शर्मिंदा करने की बजाय प्यार से समझाएं.
हर बच्चे को उसकी उम्र के हिसाब से अलग जिम्मेदारी दें. सिर्फ बड़ा होने की वजह से एक बच्चे पर दूसरे की जिम्मेदारी न डालें. दोनों बच्चों के साथ अलग-अलग थोड़ा समय जरूर बिताएं. रोज सिर्फ 10 मिनट भी अगर आप एक बच्चे के साथ अकेले बात करते हैं या खेलते हैं, तो उसे लगता है कि वह भी आपके लिए उतना ही खास है. इससे बच्चों के बीच जलन और मुकाबले की भावना कम होती है.
हर बच्चे को अपनी बात कहने का मौका दें. उनसे यह उम्मीद न करें कि वे हमेशा दूसरों के लिए अपनी खुशी छोड़ दें. बच्चों को गलतियां करने दें और उनसे सीखने का मौका दें. जब माता-पिता दोनों बच्चों को बराबर प्यार, समय और सम्मान देते हैं, तो भाई-बहनों के बीच प्यार बढ़ता है और रिश्ते मजबूत बनते हैं.
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