

आज यानी 14 अक्टूबर, बुधवार को शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है. नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. देवी के इस स्वरूप की अष्ट भुजाएं हैं, जिसमें उन्होंने कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला धारण की हुई है. मां की सवारी शेर है. नवरात्रि के चौथे दिन भक्त पूरी श्रद्धा से मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर, उनके नाम का उपवास रखते हैं. अगर आप भी आज मां की पूजा करने वाले हैं, तो पूजा के दौरान यहां से मां कुष्मांडा चालीसा, आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं-
मां कुष्मांडा का भोग । Maa Kushmanda ka bhog
मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग बेहद प्रिय माना जाता है. ऐसे में पूजा के बाद आप मां को मालपुए का भोग लगा सकते हैं. इससे अलग मां को दही और हलवे का भोग भी लगाया जाता है.
मां कुष्मांडा चालीसा | Maa Kushmanda Chalisa
॥ दोहा ॥
माता कुष्मांडा की जय, करुणा की सागर।
सुख-सम्पत्ति देने वाली, जय माँ, जय अंबर।।
॥ चौपाई ॥
जयति जयति जगत की माता।
कुष्मांडा देवी सुखदायी भ्राता।
शुम्भ-निशुम्भ हरणी माता।
भक्तों की विपदा हरणी भ्राता।।
कुश (कुमार) मंद हर्ष से भरी।
चारों ओर कृपा की झरी।
हंस पर सवार हे माता।
कृपा का अविरल बहाता॥
कुम्भ करों में जल से भरे।
धन-धान्य से भरे सारे घर॥
आभा से दीप्त हे माता।
भक्तों के संकट मिटाता॥
चतुर्थी तिथि शुभ कहलाती।
व्रत रखने से सब सफल होती।।
मंत्र का जप करों हे प्यारे।
जीवन सुखी हो जाए सारे॥
अंत में सुन लो अरज हमारी।
जीवन सवारे भवसागर से॥
जय माता कुष्मांडा भवानी।
कृपा करो हे जगत की रानी॥
मां कुष्मांडा का मंत्र | Maa Kushmanda Mantra
ऊं कूष्माण्डायै नम:
बीज मंत्र
कूष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:
ध्यान मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां कुष्मांडा की आरती | Maa Kushmanda Ki Aarti Lyrics
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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