
Sankashti Chaturthi 2026: सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है.
संकष्टी का शाब्दिक अर्थ है ‘संकटों को हरने वाली’. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखते हैं, उनके जीवन की सभी बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, साल के 12 महीनों के स्वरूप और इस दिन किए जाने वाले विशेष वास्तु उपाय.
भगवान गणेश और संकष्टी चतुर्थी का गहरा संबंध
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति कहा जाता है. संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश उपासना करने से जीवन में आने वाले सभी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्टों का निवारण होता है. शास्त्रों के अनुसार, साल के सभी 12 महीनों की चतुर्थी पर भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनका महत्व इस प्रकार है:
साल के 12 महीनों के अनुसार गणेश जी के स्वरूप:
चैत्र मास (विनायक चतुर्थी): विघ्नों के नाश और नए कार्यों की शुभ शुरुआत के लिए.
वैशाख मास (विक्रट चतुर्थी): साहस, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हेतु.
ज्येष्ठ मास (एकदंत चतुर्थी): एकाग्रता, त्याग और ज्ञान की प्राप्ति के लिए.
आषाढ़ मास (गजानन चतुर्थी): यश, कीर्ति और सामाजिक सम्मान के लिए.
श्रावण मास (हेरम्ब चतुर्थी): संकटों से रक्षा और पारिवारिक सुरक्षा हेतु.
भाद्रपद मास (विघ्नराज चतुर्थी): सर्वाधिक पूज्य, सभी विघ्नों के पूर्ण नाश हेतु.
आश्विन मास (वक्रतुण्ड चतुर्थी): रोग, भय और मानसिक अशांति से मुक्ति के लिए.
कार्तिक मास (कुबेर चतुर्थी): धन, ऐश्वर्य और आर्थिक स्थिरता हेतु.
मार्गशीर्ष मास (लंबोदर चतुर्थी): कर्ज मुक्ति, शांति और संतुलित जीवन के लिए.
पौष मास (द्वैमातुर चतुर्थी): मातृ-पितृ कृपा और पारिवारिक सौहार्द हेतु.
माघ मास (तिलकुटा चतुर्थी): पुण्य, तप और आध्यात्मिक उन्नति के लिए.
फाल्गुन मास (धूम्रवर्ण चतुर्थी): पाप नाश, ग्रह दोष शांति और आत्मशुद्धि हेतु.
संकष्टी चतुर्थी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियम और निष्ठा की मांग करता है. इसकी मानक पूजा विधि:
- संकल्प: प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें.
- उपवास: दिनभर मन को शांत रखते हुए उपवास रखें. यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो फलाहार लिया जा सकता है.
- पूजन: शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित कर उन्हें दूर्वा (दूब घास), मोदक, पीले पुष्प, रोली और धूप-दीप अर्पित करें.
- कथा व मंत्र: गणेश चालीसा, मंत्रों और संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करें.
- चंद्र दर्शन (महत्वपूर्ण): संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है. रात में चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें, आरती करें और इसके बाद ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) करें.
संकष्टी चतुर्थी के विशेष वास्तु टिप्स:
वास्तु शास्त्र के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में कुछ सकारात्मक बदलाव करने से भगवान गणेश की कृपा दोगुनी हो जाती है और घर का वास्तु दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है.
- सही दिशा में स्थापित करें मूर्ति: संकष्टी चतुर्थी की पूजा के लिए भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को हमेशा घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में स्थापित करें. यह दिशा देवताओं की मानी जाती है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.
- मुख्य द्वार पर लगाएं स्वस्तिक: इस पवित्र दिन पर घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर और घी मिलाकर स्वस्तिक चिन्ह बनाएं. वास्तु के अनुसार, इससे घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं.
- रुके हुए धन के लिए उपाय: यदि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ है, तो चतुर्थी के दिन पूजा स्थल पर पीले रंग के कपड़े पर गणेश जी की ऐसी मूर्ति रखें जिसकी सूंड दाईं ओर (सिद्धिविनायक स्वरूप) हो.
- बैठी हुई मुद्रा की तस्वीर: घर के भीतर हमेशा भगवान गणेश की बैठी हुई मुद्रा वाली तस्वीर या मूर्ति ही लगानी चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि स्थिर रहती है.
- नमक के पानी का पोछा: चतुर्थी के दिन सुबह घर की सफाई करते समय पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिला लें. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) दूर होती है.
व्रत से मिलने वाले लाभ और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से कुंडली में चंद्रमा और मंगल ग्रह से जुड़े सभी दोष शांत होते हैं. इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- ग्रह शांति: यह व्रत मन की चंचलता को दूर कर क्रोध पर नियंत्रण दिलाता है.
- तनाव से मुक्ति: मानसिक अवसाद और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है.
- सफलता की राह: व्यापार और नौकरी में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
संकष्टी चतुर्थी मात्र एक व्रत नहीं, जीवन को सकारात्मक और अनुशासित बनाने का माध्यम है. यदि इस दिन सही विधि-विधान के साथ वास्तु नियमों का पालन किया जाए, तो भगवान गणेश भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं.
यह भी पढ़े- Numerology: इस मूलांक के लोगों का होता है रॉयल व्यक्तित्व, सफलता चूमती है कदम!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.