
Rishi Panchami 2026: हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखने वाली कई महिलाओं के सामने इस बार नई उलझन है. सोमवार को तीज का व्रत रखा, रात में पूजा और जागरण किया, लेकिन मंगलवार को ऋषि पंचमी है. ऐसे में क्या पहले तीज का पारण करना चाहिए या बिना कुछ खाए ऋषि पंचमी का दूसरा व्रत शुरू कर देना चाहिए?
इसका सीधा जवाब है, पहले हरतालिका तीज के व्रत का विधिवत पारण करें, उसके बाद ऋषि पंचमी का नया संकल्प लें. पारण के लिए अन्न खाना जरूरी नहीं है. अपनी परंपरा और सेहत के अनुसार जल, फल या थोड़ा सात्विक आहार लेकर भी पहले व्रत को पूरा किया जा सकता है.
दो व्रत हैं तो संकल्प भी अलग होंगे
हरतालिका तीज माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित व्रत है. इसका पारण पूजा और रात्रि जागरण के बाद अगले दिन करने की परंपरा है. ऋषि पंचमी का व्रत सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने के भाव से रखा जाता है.
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दोनों व्रतों के देवता, कथा और संकल्प अलग हैं. इसलिए तीज का व्रत पूरा किए बिना उसे ऋषि पंचमी में जोड़ देना जरूरी नहीं है. सुबह स्नान के बाद शिव-पार्वती की पूजा करें, तीज का संकल्प पूरा करें और पारण करें. इसके बाद सप्तऋषियों का ध्यान करके ऋषि पंचमी व्रत का अलग संकल्प लिया जा सकता है.
पंचमी तिथि कब शुरू होगी?
पंचांग के अनुसार ऋषि पंचमी मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. समय शहर के अनुसार बदलता है. दिल्ली की पंचांग गणना में पंचमी तिथि सुबह लगभग 7:44 बजे शुरू होकर 16 सितंबर की सुबह तक रहेगी. सप्तऋषि पूजा का मध्याह्न समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच बताया गया है.
इस हिसाब से दिल्ली में सूर्योदय के बाद तीज की पूजा और पारण पूरा करने के लिए कुछ समय मिलेगा. इसके बाद पंचमी तिथि लगने पर ऋषि पंचमी का संकल्प लिया जा सकता है. दूसरे शहरों में तिथि कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है.
क्या पारण में अन्न खाना जरूरी है?
पारण का अर्थ व्रत के संकल्प को विधिपूर्वक पूरा करना है. इसका मतलब यह नहीं कि हर स्थिति में भरपेट भोजन या अनाज खाना ही होगा. लगातार दूसरा व्रत रखना हो तो पहले जल ग्रहण करें, फिर केला, नारियल पानी या कोई हल्का फलाहार लिया जा सकता है.
इसके बाद कुछ समय आराम करके ऋषि पंचमी का संकल्प लें. जिन परिवारों में ऋषि पंचमी पर अन्न नहीं खाया जाता, वे फलाहार पर व्रत रख सकते हैं.
कुछ क्षेत्रों में पहले व्रत का पारण दिखाने के लिए भोजन को केवल सूंघने और फिर दूसरा व्रत शुरू करने की परंपरा भी बताई जाती है. लेकिन यह सभी जगह लागू शास्त्रीय नियम नहीं है. अपनी कुल परंपरा में ऐसा नियम न हो तो केवल सुनी हुई बात के कारण इसे अपनाना जरूरी नहीं है.
बिना कुछ खाए दूसरा व्रत रखना सही है?
यदि कोई महिला पूरी तरह स्वस्थ है और परिवार में लगातार व्रत रखने की परंपरा है तो वह अपने पुरोहित के मार्गदर्शन में ऐसा कर सकती है. लेकिन इसे धर्म की अनिवार्य शर्त नहीं मानना चाहिए.
लगातार निर्जला रहने के बाद कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द या घबराहट हो तो तुरंत पानी लें. गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, मधुमेह या लो ब्लड प्रेशर वाले लोग और नियमित दवा लेने वाले श्रद्धालु डॉक्टर की सलाह के बिना लगातार कठोर व्रत न रखें.
ऋषि पंचमी का भाव भूखा रहना नहीं
ऋषि पंचमी पर कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि की पूजा की जाती है. यह दिन ऋषियों के ज्ञान को याद करने, अपनी भूल स्वीकार करने और जीवन में अनुशासन लाने का है.
इसलिए पहले तीज का पारण करके उसका संकल्प पूरा करें. फिर शरीर की क्षमता देखकर ऋषि पंचमी का व्रत रखें. क्योंकि एक व्रत पूरा किए बिना दूसरा शुरू करना श्रद्धा नहीं, केवल शरीर पर बोझ बन सकता है.
व्रत का फल इस बात से नहीं तय होता कि आप कितनी देर भूखे रहे, बल्कि इससे कि आपने पूजा कितनी श्रद्धा और समझ के साथ की.
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