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PM आवास की ओर मार्च: कब-कब की गई कोशिश, क्यों है वहां जाना मुश्किल? | Rahul Gandhi March to PM Residence Historic Attempts Political Protest Timelines



नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास तक मार्च करने की कोशिश भारतीय राजनीति में हमेशा एक प्रतीकात्मक कदम माना जाता रहा है. सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध रहते हैं और अधिकांश मामलों में प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास से पहले ही रोक दिया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है.

आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने NEET-UG पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) की ओर मार्च किया. केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की इस कोशिश से पहले भी विभिन्न राजनीतिक दल और संगठन अलग-अलग मुद्दों को लेकर पीएम आवास तक मार्च या प्रदर्शन करने का प्रयास कर चुके हैं.

 2024: अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन

मार्च 2024 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने की घोषणा की थी. AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पटेल चौक मेट्रो स्टेशन से लोक कल्याण मार्ग की ओर बढ़ने की कोशिश की. दिल्ली पुलिस ने धारा 144 लागू होने और प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया था.

2018: AAP का प्रधानमंत्री आवास मार्च

साल 2018 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों के उपराज्यपाल निवास पर धरने के बीच आम आदमी पार्टी ने भी पीएम आवास तक मार्च का ऐलान किया. यह मार्च मंडी हाउस से शुरू हुआ था, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा विभिन्न संगठनों और आम लोगों सहित हजारों लोग शामिल हुए.

दिल्ली पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए उस इलाके में लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई थी.  सुरक्षा व्यवस्था के तहत पटेल चौक, उद्योग भवन, केंद्रीय सचिवालय और लोक कल्याण मार्ग जैसे कई मेट्रो स्टेशनों के निकास भी अस्थायी रूप से बंद किए गए थे. पुलिस ने मार्च को संसद मार्ग के पास ही रोक दिया था, जो पीएम आवास से लगभग तीन किलोमीटर पहले था.

2018: विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर पीएम आवास की ओर बढ़ी TDP

आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने निकले थे. जैसे ही सांसद लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया. उस समय 19 सांसदों को हिरासत में लिया गया. पुलिस ने उन्हें विकल्प दिया कि वे या तो वहीं से वापस लौट जाएं या फिर पुलिस स्टेशन चलें. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें प्रधानमंत्री आवास के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई.

2012: अन्ना आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने की कोशिश

प्रधानमंत्री आवास की ओर प्रदर्शन का इतिहास केवल मौजूदा सरकार तक सीमित नहीं है. साल 2012 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के वक्त अन्ना हजारे के 50 से अधिक समर्थक तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के आधिकारिक आवास के बाहर पहुंच गए थे. इसके बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था.

घटना के बाद अन्ना हजारे ने कहा था कि देश में भ्रष्टाचार और अन्य समस्याओं को लेकर लोगों में व्यापक आक्रोश है, लेकिन प्रधानमंत्री से जुड़े मामलों में किसी भी कदम को सोच-समझकर उठाया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाना चाहिए.

PM इंदिरा गांधी के समय भी हुई थी घेराव की बात 

1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त किए जाने के फैसले के बाद उनके खिलाफ विपक्ष का आंदोलन तेज हो गया था. जयप्रकाश नारायण और मोरारजी देसाई समेत विपक्षी नेताओं ने 1, सफदरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास के घेराव का आह्वान किया था.

हालांकि, इससे पहले कि यह आंदोलन अपने निर्णायक चरण तक पहुंचता, 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लागू कर दिया गया. इसके साथ ही जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचना क्यों मुश्किल होता है?

प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास देश के सबसे सुरक्षित इलाकों में शामिल है. स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG), दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के कारण इस क्षेत्र में आम तौर पर धारा 144 या अन्य सुरक्षा प्रतिबंध लागू रहते हैं. यही वजह है कि प्रधानमंत्री आवास की ओर निकाले जाने वाले अधिकांश मार्च निर्धारित मार्ग से पहले ही रोक दिए जाते हैं और कई मामलों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है.

प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिशें अलग-अलग सरकारों के दौरान विभिन्न मुद्दों पर होती रही हैं. हालांकि, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के चलते ज्यादातर मामलों में प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है.

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