

ग्लोबल मार्केट से गुड न्यूज मिल रही है. महीनो से चल रहे अमेरिका-ईरान के बीज जंग पर आखिरकार विराम लगता दिखा रहा है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं. सप्लाई सुधरने की उम्मीद से मंगलवाल को ब्रेंट क्रूड पुराने सेशन से 5% टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आया गया. वहीं डब्ल्यूटीआई भी 81 डॉलर के आसपास बना हुआ है. इसी बीच आम जनता के मन में इस समय बड़ा सवाल यही है कि क्या इस शांति समझौते के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हुईं?
तेल कंपनियों ने स्थिर रखीं कीमतें
वैश्विक मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद भी भारतीय तेल कंपनियों ने 16 जून को पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है. देश के बड़े शहरों में ईंधन के दाम पुराने लेवल पर ही स्टेबल बने हुए हैं.
देश के बड़े शहरों में 16 जून को पेट्रोल की कीमतें
- दिल्ली: ₹102.12 प्रति लीटर
- मुंबई: ₹111.21 प्रति लीटर
- कोलकाता: ₹113.51 प्रति लीटर
- चेन्नई: ₹108.01 प्रति लीटर
- बेंगलुरु: ₹110.89 प्रति लीटर
- हैदराबाद: ₹115.73 प्रति लीटर
देश के बड़े शहरों में 16 जून को डीजल के दाम
- दिल्ली: ₹95.20 प्रति लीटर
- मुंबई: ₹97.83 प्रति लीटर
- कोलकाता: ₹99.82 प्रति लीटर
- चेन्नई: ₹99.66 प्रति लीटर
- बेंगलुरु: ₹98.80 प्रति लीटर
- हैदराबाद: ₹103.82 प्रति लीटर
जंग से लगा जेब को झटका
मालूम हो कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया था, जिसके चलते सप्लाई चेन रुक गई थी. नतीजन कच्चे तेल के दाम आसमान पर पहुंच गए. इसी दौरान भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 4 बार इजाफा किया. कुल मिलाकर जंग की शुरुआत से अब तक पेट्रोल-डीजल 7.5 रुपये से 8 रुपये तक महंगा हो चुका है.
तेल कंपनियों को मिली राहत
भले ही अभी देश में आम नागरिकों को फौरी तौर पर राहत ना मिली हो, पर कच्चे तेल के दाम गिरने से तेल कंपनियों को लगने वाला झटका कम जरूर हुआ है. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कंपनियों की अंडर रिकवरी कम हो गई है. 1 अप्रैल 2026 को जहां कंपनियों को 24 रुपये प्रति लीटर नुकसान हो रहा था, वो अब 83% कम होकर सिर्फ 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है. यही हाल डीजल का है. इस पर होने वाला नुकसान 75% घटकर 27 रुपये प्रति लीटर पर आ गया. जंग के समय इन कंपनियों को हर दिन 1600 से 1700 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था.
क्या आने वाले दिनों में कीमतें कम होंगी?
एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच इफ्ते समझौते पर साइन हो सकते हैं. इसके अलावा धीरे-धीरे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर से प्रेशर कम हो रहा है. उम्मीद है कि ये भी जल्द ही पूरा खुल जाएगा. ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतें नीचे बनी रहती हैं और डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी पकड़ता है तो आने वाले दिनों में तेल कंपनी पेट्रोल-डीजल की कीमतें कुछ कम कर सकती हैं.
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