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Parenting Tips: सिर्फ टॉपर नहीं, बच्चों को बनाएं कॉन्फिडेंट, पैरेंट्स जान लें ये 5 जरूरी टिप्स | 5 tips for parents to build up confidence in children parenting tips



Parenting Tips: आजकल के कॉम्पिटिटिव माहौल में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा करे और आगे बढ़े. एग्जाम में अच्छे मार्क्स काफी ज्यादा जरूरी हैं लेकिन किसी बच्चे की पहचान सिर्फ उसके नंबरों या रैंक से नहीं होती. असल सफलता तब है जब बच्चा अपनी बात कॉन्फिडेंस से रख सके, सही-गलत का फैसला कर सके और अपनी गलतियों से सीख सके. ऐसे गुण बच्चों में अपने आप नहीं आते, बल्कि उनकी परवरिश और घर काा माहौल डेवलेप करने में मदद करता है. इसी कड़ी में आज हम पैरेंट्स के लिए ऐसी 5 टिप्स बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से माता-पिता अपने बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं. इसकी जानकारी संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल्स के ट्रस्टी प्रनीत मुंगाली ने दी है.

1. बच्चे की कोशिशों और प्रयासों की सराहना करें

एक्सपर्ट के अनुसार बार-बार बच्चे से सिर्फ नंबर और रैंक के बारे में पूछने की जगह उसकी पढ़ाई और परफॉर्मेंस पर खुलकर बात करें. उसकी कोशिशों और की गई मेहनत की सराहना करें. जब आप उससे कहते हैं, ‘तुमने अपना बेस्ट किया है’, तो उसे महसूस होता है कि उसकी मेहनत की कद्र की जा रही है. इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा.

2. बच्चों पर भरोसा जताएं

एक्सपर्ट के अनुसार दूसरे बच्चों से तुलना करने के बजाय माता-पिता को अपने बच्चे पर भरोसा करना चाहिए. हर बच्चे की सीखने और आगे बढ़ने की अपनी स्पीड होती है. लगातार तुलना करने से बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है. ‘तुम कल सेे बेहतर कर रहे हो’ और “मुझे तुम पर भरोसा है” जैसे शब्द बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करते हैं.

3. बच्चों को बात कहने और रखने का मौका दें

बच्चों को अपनी बात कहने और अपने विचार खुलकर रखने का मौका दें. उनकी बातों को ध्यान से सुनें. साथ ही उनकी सोच को समझने की कोशिश करें. इसके अलावा पढ़ाई, खेलकूद या रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों से जुड़े फैसले लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें. इससे बच्चों में अपनी राय रखने का कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वे जिम्मेदारियां निभाना भी सीखते हैं.

4. गलती पर न डांटें

जब भी आपका बच्चा कोई गलती करे, तो उसे डांटने की जगह उससे पूछें कि वो अगली बार क्या बेहतर कर सकता है. अगर घर का माहौल डर की जगह सपोर्ट वाला होगा, तो बच्चा अपनी गलतियों से सीख पाएगा. इससे वो नई चुनौतियों का सामना करनेे और समस्याओं को खुद सुलझाने के लिए भी कॉन्फिडेंस डेवलेप करेगा.

5. बच्चे के इमोशन्स को समझें

बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करने की जगह उन्हें समझने और खुलकर शेयर करने के लिए प्रोत्साहित करें. जब बच्चा उदास, परेशान या गुस्से में हो, तो उसकी बात ध्यान से सुनें और उसे यह महसूस कराएं कि उसकी फीलिंग्स महत्वपूर्ण हैं.

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